हैदराबाद। तेलंगाना भाजपा के मुख्य प्रवक्ता एन.वी. सुभाष (N.V. Subhash) ने आरोप लगाया कि तेलंगाना में कांग्रेस और बीआरएस के बीच ‘फिक्सिंग पॉलिटिक्स’ चल रही है। उन्होंने कहा कि दोनों पार्टियां आपसी समझ के तहत जनता को गुमराह करने के लिए “राजनीतिक नाटक” कर रही हैं। भाजपा राज्य कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुभाष ने कहा कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (KCR) द्वारा एक ही दिन जिलों में बड़ी सभाएं करना संयोग नहीं, बल्कि पूर्व निर्धारित रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर तेलंगाना में भाजपा के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए दोनों दल एकजुट हो रहे हैं।
प्रवक्ता का बड़ा आरोप, भाजपा के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए दोनों दल एकजुट
सुभाष ने केसीआर की कार्यशैली की आलोचना करते हुए कहा कि सत्ता से बाहर होने के 26 महीने बाद भी वे जनादेश का सम्मान नहीं कर रहे हैं और विपक्ष के नेता के रूप में विधानसभा में सक्रिय नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केसीआर जनता की समस्याओं को उठाने के बजाय केवल पार्टी विस्तार पर ध्यान दे रहे हैं। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर निशाना साधते हुए सुभाष ने कहा कि कालेश्वरम परियोजना को पहले देश का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार बताने वाले मुख्यमंत्री अब कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोपों को दबाने के लिए सीमित मुद्दों पर ही जांच की बात की जा रही है।

सीबीआई जांच के लिए पूरी अनुमति देने से पीछे हट रही है राज्य सरकार
सुभाष ने यह भी कहा कि राज्य सरकार सीबीआई जांच के लिए पूरी अनुमति देने से पीछे हट रही है और कांग्रेस तथा बीआरएस एक-दूसरे को बचा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के दौरों पर भारी जनधन खर्च हो रहा है, जबकि यह राशि किसानों के हित में उपयोग की जा सकती थी। कांग्रेस सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए सुभाष ने कहा कि ऋणमाफी और ‘रैतू भरोसा’ जैसी योजनाओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश में एन. चंद्रबाबू नायडू द्वारा मंदिरों के विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए तेलंगाना सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाया। महिला आरक्षण विधेयक के मुद्दे पर भी सुभाष ने कांग्रेस और उसके सहयोगियों की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने राजनीतिक लाभ के लिए इसका विरोध किया।
विपक्ष ने खड़ी कीं बाधाएं
उन्होंने दावा किया कि केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार ने इसे ऐतिहासिक कदम के रूप में आगे बढ़ाया, लेकिन विपक्ष ने बाधाएं खड़ी कीं। सुभाष ने राज्य में बढ़ती ड्रग्स समस्या और टीएसपीएससी पेपर लीक मामले को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और बीआरएस की ‘फिक्सिंग पॉलिटिक्स’ को जनता समझ रही है और भाजपा हमेशा जनहित के मुद्दों पर संघर्ष करती रहेगी।
महिला आरक्षण बिल क्या है?
संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को प्रतिनिधित्व बढ़ाने के उद्देश्य से लाया गया प्रावधान महिला आरक्षण बिल कहलाता है। इसके तहत कुल सीटों में 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने की व्यवस्था की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और निर्णय प्रक्रिया में उनकी भूमिका को मजबूत करना है, जिससे लैंगिक समानता को बढ़ावा मिल सके।
128वां संविधान संशोधन विधेयक क्या है?
महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में आरक्षण देने के लिए प्रस्तुत 128वां संविधान संशोधन विधेयक एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रस्ताव है। इसे “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” के नाम से भी जाना जाता है। इसके माध्यम से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है। यह विधेयक महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जाता है।
भारत में महिलाओं को कितना आरक्षण है?
वर्तमान समय में भारत में स्थानीय निकायों जैसे पंचायत और नगर निकायों में महिलाओं को कम से कम 33% आरक्षण दिया गया है, जिसे कई राज्यों में बढ़ाकर 50% तक कर दिया गया है। संसद और विधानसभाओं में 33% आरक्षण का प्रावधान नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत किया गया है, लेकिन इसका पूर्ण क्रियान्वयन जनगणना और परिसीमन के बाद लागू होगा।
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