नई दिल्ली। राज्यसभा में कोयला मंत्रालय से जुड़े प्रश्न का उत्तर देते हुए केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी (G. Kishan Reddy) ने कहा कि एनडीए सरकार के आने के बाद कोयला क्षेत्र में व्यापक सुधार किए गए हैं और अब कोयला ब्लॉकों का आवंटन पूरी तरह पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया के जरिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले कोयला ब्लॉकों का आवंटन कागजों पर किया जाता था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया गया है, जिससे भ्रष्टाचार पर रोक लगी है। मंत्री ने बताया कि देश में थर्मल बिजली उत्पादन का लगभग 73 प्रतिशत हिस्सा कोयले पर आधारित है। पहले देश में बिजली की भारी (Massive power outage) कमी रहती थी, जिससे कृषि, उद्योग और घरेलू जरूरतें प्रभावित होती थीं। लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है और देश में कहीं भी बिजली की कमी नहीं है।
उत्पादन के लिए करीब 80 प्रतिशत कोयला आपूर्ति की जा रही
उन्होंने कहा कि वर्तमान में बिजली उत्पादन के लिए करीब 80 प्रतिशत कोयला आपूर्ति की जा रही है। साथ ही सीमेंट, स्टील और उर्वरक जैसे प्रमुख क्षेत्रों को भी लगातार कोयला उपलब्ध कराया जा रहा है। किशन रेड्डी ने बताया कि भारत के पास लगभग 70 वर्षों के लिए पर्याप्त कोयला भंडार मौजूद है। कोयला भंडार के मामले में भारत दुनिया में पांचवें स्थान पर है, जबकि उत्पादन और खपत में दूसरे स्थान पर है। उन्होंने कहा कि कोल इंडिया लिमिटेड विश्व की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी है। मंत्री ने कहा कि सरकार पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण पर भी विशेष ध्यान दे रही है। इसके तहत कोल गैसीफिकेशन तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है और स्वतंत्रता के बाद पहली बार 7 परियोजनाएं शुरू की जा रही हैं, जिनमें से 4 परियोजनाओं का भूमि पूजन हो चुका है।
64 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे
इन परियोजनाओं पर लगभग 64 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि ये परियोजनाएं महाराष्ट्र, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में स्थापित की जा रही हैं। कोल गैसीफिकेशन से कोयला आयात में कमी आएगी और इसके लिए प्रोत्साहन भी दिए जा रहे हैं। किशन रेड्डी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर 143 कोयला खदानों को वैज्ञानिक तरीके से बंद करने का कार्य शुरू किया गया है। इसके लिए 143 नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं और जिला कलेक्टरों की निगरानी में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2028 तक इन खदानों को बंद कर वहां विकास कार्य पूरे किए जाएंगे, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे।
वर्तमान कोयला मंत्रालय कौन है?
भारत में कोयला मंत्रालय का नेतृत्व वर्तमान में जी. किशन रेड्डी कर रहे हैं। वे केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री के रूप में कार्यरत हैं। यह मंत्रालय देश में कोयला उत्पादन, वितरण और नीतियों के निर्माण का काम संभालता है। इसका मुख्य उद्देश्य ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करना और कोयला क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देना है।
झारखंड के कोयला मंत्री कौन हैं?
झारखंड में कोयला से जुड़ा विषय केंद्र सरकार के अधीन आता है, इसलिए अलग से “राज्य कोयला मंत्री” का पद नहीं होता। हालांकि राज्य में खनन और उद्योग विभाग के मंत्री इस क्षेत्र से संबंधित कार्यों को देखते हैं। वर्तमान में खनन से जुड़े मामलों में राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, विशेषकर कोयला खदानों के संचालन और नीतियों में।
कोल इंडिया का राष्ट्रीयकरण कब हुआ था?
Coal India Limited का राष्ट्रीयकरण वर्ष 1975 में किया गया था। इससे पहले देश में कोयला खदानें निजी हाथों में थीं। राष्ट्रीयकरण के बाद सरकार ने कोयला उद्योग को अपने नियंत्रण में लेकर उत्पादन और सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाया। इस कदम से देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई और कोयला क्षेत्र में संगठित विकास संभव हो सका।
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