Crime : अवैध शराब बिक्री में दो आरोपी गिरफ्तार

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हैदराबाद। गोशामहल थाना पुलिस ने अवैध रूप से शराब बेचने के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके कब्जे से 17 बोतल आईएमएफएल (Indian-Made Foreign Liquor) व्हिस्की बरामद की है। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई 16 अप्रैल की सुबह बेगम बाजार स्थित लेबर अड्डा क्षेत्र में गश्त के दौरान की गई। संदिग्ध रूप से घूम रहे दो व्यक्तियों को रोककर तलाशी लेने पर उनके पास से ‘गुड डे प्रेस्टिज व्हिस्की’ की 180 एमएल की 17 बोतलें बरामद हुईं, जिन्हें वे बिना लाइसेंस के ऊंचे दामों पर बेच रहे थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अर्जुन सिंह (29) और ठाकुर गोपाल सिंह (39) के रूप में हुई है। पूछताछ में दोनों ने सस्ते दाम पर शराब (Wine) खरीदकर अधिक कीमत पर बेचने की बात स्वीकार की।

तेलंगाना आबकारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया

पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपियों के खिलाफ तेलंगाना आबकारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। बरामद शराब की कुल मात्रा लगभग 3.06 लीटर बताई गई है। जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों आरोपी पहले भी विभिन्न आपराधिक मामलों में संलिप्त रह चुके हैं। पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है। पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे अवैध स्रोतों से शराब न खरीदें और ऐसी गतिविधियों की जानकारी तुरंत नजदीकी थाने को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

अवैध शराब बेचने पर क्या सजा होती है?

भारत में अवैध शराब बेचने पर सख्त सजा का प्रावधान है। अलग-अलग राज्यों के आबकारी कानूनों के अनुसार दोषी व्यक्ति को 6 महीने से लेकर 3 साल या उससे अधिक की जेल हो सकती है। इसके साथ जुर्माना भी लगाया जाता है। यदि अवैध शराब से किसी की मृत्यु हो जाए, तो सजा और भी कठोर हो जाती है, जिसमें लंबी कैद तक हो सकती है।

बिना लाइसेंस वाली शराब बेचने पर अधिकतम जुर्माना कितना है?

बिना लाइसेंस शराब बेचने पर जुर्माना राज्य के कानूनों के अनुसार अलग-अलग होता है। आमतौर पर यह 10,000 रुपये से लेकर 1 लाख रुपये या उससे अधिक तक हो सकता है। कई मामलों में जुर्माने के साथ जेल की सजा भी दी जाती है। यह प्रावधान संबंधित राज्य के आबकारी अधिनियम के तहत लागू होता है।

दारू का टेंडर कैसे मिलता है?

शराब की दुकान या ठेका लेने के लिए राज्य सरकार के आबकारी विभाग द्वारा टेंडर या ई-निविदा प्रक्रिया जारी की जाती है। इच्छुक व्यक्ति को आवेदन करना होता है, निर्धारित फीस जमा करनी होती है और जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं। चयन प्रक्रिया में बोली (बिड) के आधार पर ठेका दिया जाता है। सभी नियम राज्य के आबकारी विभाग द्वारा तय किए जाते हैं।

अवैध शराब पकड़ने पर कौन सी धारा लगती है?

ऐसे मामलों में संबंधित राज्य के आबकारी अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाती है, जैसे उत्तर प्रदेश में उत्तर प्रदेश आबकारी अधिनियम लागू होता है। इसके अलावा स्थिति के अनुसार भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराएं भी लग सकती हैं। पुलिस और आबकारी विभाग मिलकर इस तरह के अपराधों पर कार्रवाई करते हैं।

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Ajay Kumar Shukla

लेखक परिचय

Ajay Kumar Shukla

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