पॉक्सो कानून क्या है?
POCSO Act India : बच्चों के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों को रोकने के लिए केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया सबसे सख्त कानून पॉक्सो एक्ट माना जाता है। हाल के दिनों में यह कानून फिर चर्चा में आ गया है। केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद बंडी संजय के बेटे भगीरथ पर पॉक्सो कानून के तहत मामला दर्ज होने के बाद लोग इस कानून के बारे में ज्यादा जानकारी खोज रहे हैं। हैदराबाद के पेट बशीराबाद पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत के आधार पर पुलिस ने पॉक्सो कानून और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। इसके बाद लोगों में यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई है कि पॉक्सो कानून क्या है और इसमें क्या प्रावधान हैं। POCSO का पूरा नाम “प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस” है। यह कानून बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देने के लिए वर्ष 2012 में लागू किया गया था।
लड़कों और लड़कियों दोनों पर लागू
कई लोग मानते हैं कि यह कानून केवल लड़कियों की सुरक्षा के लिए है, लेकिन ऐसा नहीं है। 18 वर्ष से कम आयु के लड़के और लड़कियां दोनों इस कानून के दायरे में आते हैं। बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न, अश्लील हरकतें, गलत तरीके से छूना, अश्लील वीडियो दिखाना जैसी सभी गतिविधियां इस कानून के तहत अपराध मानी जाती हैं। सामान्य मामलों की तुलना में पॉक्सो कानून के तहत कार्रवाई काफी सख्त होती है। इस कानून के तहत मामला दर्ज होने पर आरोपी को आसानी से जमानत नहीं मिलती। सामान्य मामलों में पुलिस को आरोपी का अपराध साबित करना पड़ता है, लेकिन पॉक्सो मामलों में आरोपी को खुद अदालत में साबित करना होता है कि वह निर्दोष है। बच्चों को जल्दी न्याय दिलाने के लिए विशेष पॉक्सो अदालतें बनाई जाती हैं, जहां मामलों की सुनवाई तेजी से होती है।
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पॉक्सो में सजा कितनी होती है?
पॉक्सो कानून में अपराध की गंभीरता के अनुसार सजा तय होती है। यदि कोई व्यक्ति बच्चे के साथ अश्लील हरकत (POCSO Act India) करता है या गलत तरीके से छूता है तो उसे तीन से पांच साल तक की जेल हो सकती है। गंभीर यौन अपराधों में सात साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा दी जा सकती है। वर्ष 2019 में किए गए संशोधन के बाद छोटे बच्चों के साथ बेहद गंभीर अपराध करने वालों के लिए फांसी की सजा का प्रावधान भी जोड़ा गया है। इसी वजह से पॉक्सो कानून को भारत के सबसे सख्त कानूनों में गिना जाता है। इस कानून के अनुसार पीड़ित बच्चे का नाम, फोटो, स्कूल या पहचान से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करना भी अपराध माना जाता है। मीडिया या सोशल मीडिया पर ऐसी जानकारी साझा करने वालों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। बच्चों की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए यह कानून बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
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