Thailand Vs Cambodia : थाईलैंड और कंबोडिया के बीच मंदिर विवाद

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अब तक 16 की मौत, थाईलैंड ने बॉर्डर इलाकों से 1 लाख लोगों को हटाया

Thailand Vs Cambodia : थाईलैंड और कंबोडिया (Thailand Vs Cambodia) के बीच 1000 हजार साल पुराने दो शिव मंदिरों (shiva temples) को लेकर शुरू हुआ संघर्ष दूसरे दिन भी जारी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आज दोनों देशों के बीच सीमा पर 12 जगहों पर झड़पें हुई हैं

Thailand Vs Cambodia : थाई सरकार ने बताया कि 1 लाख से ज्यादा लोग घर छोड़ने के लिए मजबूर हो चुके हैं। अब तक थाईलैंड के 15 लोगों की मौत हुई है। इसमें 1 सैनिक और 14 आम लोग हैं। 46 लोग घायल हुए हैं।

अभी तक कंबोडिया की तरफ से मृतकों या घायलों की कोई आधिकारिक संख्या नहीं बताई गई है। हालांकि, कई मीडिया रिपोर्ट्स में 1 शख्स के मारे जाने का दावा किया जा रहा है।

थाईलैंड ने कंबोडिया की सीमा से लगे 8 जिलों में मार्शल लॉ घोषित कर दिया है। थाईलैंड के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि सीजफायर की बात करना अभी जल्दबाजी होगी, जब तक कंबोडिया अपनी आक्रामक कार्रवाई नहीं रोकता

इस विवाद को देखते हुए थाईलैंड स्थित भारतीय दूतावास ने एक ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। इसमें भारतीय नागरिकों से थाईलैंड और कंबोडिया सीमा के पास 7 राज्यों में जाने से बचने की अपील की गई है।

कंबोडिया और थाईलैंड के बीच मंदिर विवाद को जानिए…

थाईलैंड और कंबोडिया का इतिहास लंबे समय तक खमेर साम्राज्य (कंबोडिया) और सियाम साम्राज्य (थाईलैंड) के बीच टकरावों से जुड़ा रहा है।

फ्रांस और ब्रिटिश शासन के दौरान भी दोनों देशों की सीमाओं को तनाव था, जिसकी वजह से प्रीह विहियर (प्रिय विहार) और ता मुएन थॉम मंदिरों के आसपास की जमीन पर अधिकार को लेकर कानूनी और राजनीतिक विवाद लगातार चलता रहा था।

1907 में जब कंबोडिया फ्रांस के अधीन था तब दोनों देशों के बीच 817 किमी की लंबी सीमा खींची गई थी।

थाईलैंड ने इसका विरोध किया, क्योंकि नक्शे में प्रीह विहियर (प्रिय विहार) मंदिर कंबोडिया के हिस्से में दिखाया गया था।

वहीं, ता मुएन थॉम मंदिर को थाईलैंड में दिखाया गया, जबकि कंबोडिया इसे अपना मानता है।

ता मुएन थॉम मंदिर पर कंबोडिया का दावा

ता मुएन थॉम मंदिर दोनों देशों की सीमा के उस हिस्से में आता है जो ठीक से तय नहीं है। यही वजह है कि इस पर दोनों देश अपना दावा करते हैं।

यह थाईलैंड की तरफ स्थित है, लेकिन कंबोडिया दावा करता है कि यह उसका ऐतिहासिक हिस्सा है, क्योंकि यह खमेर साम्राज्य के दौर में बना था।

खमेर साम्राज्य कंबोडिया की एक शक्तिशाली और प्रभावशाली सभ्यता थी, जो 9वीं से 15वीं शताब्दी तक रही। इस साम्राज्य ने कंबोडिया के अलावा लाओस, थाईलैंड और वियतनाम के कई हिस्सों पर शासन किया।

वहीं, थाईलैंड का दावा है कि मंदिर तो कंबोडिया का हो सकता है लेकिन उसके चारों ओर की जमीन पर उसका हक है।

दोनों देशों की सेनाएं इस मंदिर के आसपास नियमित रूप से गश्त करती हैं, जिससे यहां अक्सर झड़पें हो जाती हैं। इस बार की झड़प भी इसी मंदिर के पास हुई।

प्रीह विहियर मंदिर पर थाईलैंड का दावा

प्रीह विहियर मंदिर पर दोनों देशों में विवाद ज्यादा है। थाईलैंड इस मंदिर पर कंट्रोल करने की कोशिश में लगातार लगा रहा, जिसके बाद 1959 में कंबोडिया यह मामला अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में लेकर गया।

साल 1962 में अदालत ने फैसला दिया कि मंदिर कंबोडिया का है। कोर्ट ने थाईलैंड को अपने सैनिक हटाने का आदेश दिया। तब थाईलैंड ने इसे स्वीकार किया, लेकिन आसपास की जमीन को लेकर विवाद जारी रखा।

हेरिटेज साइट में शामिल होने पर बड़ा विवाद

2008 में यह विवाद तब और बढ़ गया जब इस मंदिर को यूनेस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल कर लिया। मंदिर को मान्यता मिलने के बाद दोनों देशों की सेनाओं में फिर झड़पें शुरू हो गईं और 2011 में तो हालात इतने बिगड़ गए कि हजारों लोग अपने घर छोड़ने पर मजबूर हो गए।

साल 2013 में कोर्ट ने अपने पुराने फैसले को साफ करते हुए कहा कि मंदिर ही नहीं, उसके आसपास का क्षेत्र भी कंबोडिया का है। साथ ही थाईलैंड को अपनी सेना वहां से पूरी तरह हटाने को कहा गया। हालांकि सीमा का मुद्दा अब तक पूरी तरह हल नहीं हो पाया है।

थाईलैंड कंबोडिया से किस शताब्दी में स्वतंत्र हुआ था?

14वीं शताब्दी से थाई अयुत्या साम्राज्य ने धीरे-धीरे क्षीण होते खमेर साम्राज्य को विस्थापित कर दिया, 19वीं-20वीं शताब्दी के अंत में फ्रांसीसी संरक्षण ने कंबोडिया को आधुनिक थाईलैंड से अलग कर दिया, और 19 दिसंबर 1950 को दोनों आधुनिक राज्यों के बीच राजनयिक संबंध स्थापित हुए।

थाईलैंड कंबोडिया के साथ मित्रवत है?

इसे सुनेंयद्यपि दोनों देशों के बीच संबंध काफी हद तक शांतिपूर्ण हैं , फिर भी दोनों देशों के लोगों के बीच कुछ हद तक शत्रुता है, तथा दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक विरासत ने एक भयंकर राष्ट्रवादी प्रतिद्वंद्विता को जन्म दिया है, जो अक्सर ऐसी विरासत के स्वामित्व और उत्पत्ति के दावों को लेकर ऑनलाइन युद्धों के माध्यम से व्यक्त होती है।

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Surekha Bhosle

लेखक परिचय

Surekha Bhosle

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