मास्को । रूस, जिसकी करीब 3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बड़े पैमाने पर तेल भंडार पर निर्भर करती है, इस समय गंभीर दबाव में नजर आ रहा है। यूक्रेन द्वारा रूसी तेल (Russia oil) रिफाइनरियों और बंदरगाहों पर किए जा रहे लगातार ड्रोन हमलों ने देश की ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावित किया है, जिससे उत्पादन पर असर पड़ रहा है।
ऊर्जा ढांचे पर यूक्रेन का फोकस
यूक्रेनी सेना ने रणनीति बदलते हुए रूस के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना शुरू किया है। इसके चलते रिफाइनरियों और प्रमुख बंदरगाहों को नुकसान पहुंचा है, जिससे तेल उत्पादन और सप्लाई चेन प्रभावित हुई है।
उत्पादन में गिरावट की आशंका
मीडिया रिपोर्ट्स (Media Reports) के मुताबिक अप्रैल में रूस के तेल उत्पादन में रोजाना 3 से 4 लाख बैरल तक की कमी आने का अनुमान है। यदि ऐसा होता है, तो यह कोविड-19 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट मानी जाएगी, जो रूसी अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है।
राजस्व और युद्ध खर्च पर असर
तेल राजस्व रूस के बजट का बड़ा हिस्सा है और युद्ध खर्चों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में उत्पादन और निर्यात में गिरावट से सरकार की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है।
बढ़ती कीमतों से अस्थायी राहत
इस बीच ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखा गया है। इससे रूस को कुछ हद तक राहत मिल सकती है, क्योंकि ऊंची कीमतें कम उत्पादन से होने वाले नुकसान की आंशिक भरपाई कर सकती हैं।
लंबी अवधि में चुनौती बरकरार
विशेषज्ञों का मानना है कि यह राहत अस्थायी है। अगर हमले जारी रहते हैं और रिफाइनरियों की मरम्मत में देरी होती है, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
प्रतिबंधों से मरम्मत में दिक्कत
अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण रूस को उन्नत पश्चिमी तकनीक और उपकरणों तक सीमित पहुंच मिल रही है, जिससे क्षतिग्रस्त ढांचे की मरम्मत और अधिक जटिल हो गई है।
अर्थव्यवस्था और युद्ध रणनीति पर असर
यूक्रेन के ये हमले केवल तेल उत्पादन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रूस की युद्ध क्षमता और उसकी वैश्विक आर्थिक स्थिति पर भी सीधा असर डाल रहे हैं। अब यह देखना अहम होगा कि रूस इन चुनौतियों से कैसे निपटता है और क्या इससे उसकी युद्ध रणनीति में बदलाव आता है।
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