तेहरान । ईरान और अमेरिका (Iran and America) के बीच जारी संघर्ष के बीच रक्षा विशेषज्ञ इस सवाल पर चर्चा कर रहे हैं कि ईरान ने कथित तौर पर अमेरिका के अत्याधुनिक फाइटर जेट्स को कैसे निशाना बनाया। यह मुद्दा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि अमेरिका ने पहले दावा किया था कि उसने ईरान के रडार (Radar) और एयर डिफेंस सिस्टम को काफी हद तक निष्क्रिय कर दिया है।
एफ-15ई को लेकर दावों से बढ़ी चर्चा
रिपोर्ट्स के अनुसार 3 अप्रैल को एफ-15ई स्ट्राइक ईगल को नुकसान पहुंचाने और ए-10 वार्टहॉग को भी क्षति पहुंचने के दावे सामने आए हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी स्पष्ट रूप से नहीं हो पाई है, लेकिन इससे वैश्विक रक्षा हलकों में हलचल बढ़ गई है।
पारंपरिक रडार सिस्टम से अलग रणनीति
जांच में सामने आया है कि ईरान ने पारंपरिक रडार आधारित एयर डिफेंस सिस्टम के बजाय एक अलग रणनीति अपनाई। सामान्य तौर पर फाइटर जेट्स में रडार वॉर्निंग सिस्टम होता है, जो दुश्मन के रडार सिग्नल को पकड़कर पायलट को सतर्क कर देता है।
‘माजिद’ सिस्टम की खासियत
बताया जा रहा है कि ईरान के ‘माजिद’ नामक सिस्टम में पारंपरिक रडार का इस्तेमाल नहीं किया जाता। यह इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इन्फ्रारेड तकनीक पर आधारित है, जो रडार तरंगों की जगह विमान के इंजन से निकलने वाली गर्मी को ट्रैक करता है।
इंफ्रारेड ट्रैकिंग से सटीक निशाना
इस सिस्टम के सेंसर दूर से ही इंजन की गर्मी को पहचान कर मिसाइल को लक्ष्य तक पहुंचाते हैं। इस तरह के सिस्टम कम ऊंचाई पर उड़ रहे विमानों के लिए अधिक चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं, क्योंकि उन्हें पहले से चेतावनी मिलना मुश्किल होता है।
छोटे आकार और मोबाइल तैनाती की बढ़त
‘माजिद’ सिस्टम का आकार छोटा बताया जाता है, जिससे इसे मोबाइल प्लेटफॉर्म पर आसानी से तैनात किया जा सकता है। पहाड़ी, जंगल या शहरी इलाकों में छिपाकर उपयोग करने की क्षमता इसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाती है।
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कम लागत, ज्यादा प्रभाव की रणनीति
रिपोर्ट्स के मुताबिक यह सिस्टम अपेक्षाकृत कम लागत वाला है, जबकि आधुनिक फाइटर जेट्स और मिसाइल सिस्टम बेहद महंगे होते हैं। ऐसे में यह उदाहरण दिखाता है कि युद्ध में केवल महंगी तकनीक ही नहीं, बल्कि नई रणनीति और तकनीकी नवाचार भी अहम भूमिका निभाते हैं।
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