बीजिंग। एक खुफिया रिपोर्ट सामने आई है। इसमें दावा किया गया है कि चीन ने एशिया (Asia) प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका के साथ किसी भी संभावित संघर्ष से निपटने के लिए अपनी तैयारी को रॉकेट की रफ्तार दे दी है। रिपोर्ट के मुताबिक सैटेलाइट इमैज और मैप के विश्लेषण के जरिए यह निष्कर्ष निकाला गया है।
अमेरिका और रूस के बीच परमाणु दौड़ में अब चीन भी कूदा
बता दें कि एक तरफ अमेरिका ने फिर से परमाणु परीक्षण करने की घोषणा की है तो दूसरी तरफ रूस ने परमाणु हथियार दागने वाली दुनिया की सबसे ताकतवर मिसाइल (Missile) का परीक्षण किया है। अब इस खेल में चीन भी उतर गया है। उसने ऐसे हथियारों का परीक्षण शुरू किया है जो किसी रक्त बीज से कम नहीं हैं। इनके हमले से दुनिया पूरी तरह तबाह हो सकती है।
मिसाइल उत्पादन में तेजी से विस्तार
रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन अपनी सैन्य ताकत को और मजबूत करने के लिए मिसाइल उत्पादन सुविधाओं का तेजी से विस्तार कर रहा है। इसका उद्देश्य एशिया-प्रशांत क्षेत्र में किसी भी संभावित संघर्ष में अमेरिकी सेना को रोकना है। विश्लेषण से पता चला है कि चीन की मिसाइल (Missile of China) उत्पादन से जुड़ी 136 सुविधाओं में से 60 फीसदी से अधिक का विस्तार किया जा रहा है।
सैटेलाइट तस्वीरों से खुला राज
इन सुविधाओं में कारखाने, अनुसंधान केंद्र और परीक्षण केंद्र शामिल हैं, जिनका क्षेत्रफल 2020 की शुरुआत से 2025 के अंत तक 20 लाख वर्ग मीटर से अधिक बढ़ गया है। सैटेलाइट तस्वीरों में इन स्थलों पर नए टावर, बंकर और मिट्टी की दीवारें दिखाई दी हैं, जो हथियार विकास के अनुरूप हैं।
हथियारों की झलक –परमाणु मिसाइलों से स्टील्थ फाइटर तक
पिछले सितंबर में चीन ने द्वितीय विश्व युद्ध में जापान की हार की 80वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में बीजिंग में आयोजित सैन्य परेड में अपनी नई मिसाइलों का प्रदर्शन किया था। इस परेड में परमाणु-सक्षम मिसाइलों में डीएफ-61 इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) को प्रदर्शित किया गया, जिसे मोबाइल लॉन्चिंग प्लेटफॉर्म से दागा जा सकता है।
इसके अलावा साइलो-आधारित डीएफ-5सी मिसाइल का नवीनतम संस्करण भी दिखाया गया, जिसकी रेंज 20,000 किलोमीटर तक होने का अनुमान है। वहीं, जेएल-1, जेएल-3, वाईजे-15, वाईजे-17, वाईजे-19 और वाईजे-20 मिसाइलें भी पेश की गईं, जो समुद्र और हवा दोनों से दागी जा सकती हैं।
ताइवान को लेकर बढ़ सकता है तनाव
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का यह कदम ताइवान पर किसी भी संभावित हमले में मिसाइलों की भूमिका को दर्शाता है। ताइवान एक स्व-शासित द्वीप है, जिसे बीजिंग अपना हिस्सा मानता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मिसाइल उत्पादन का यह विस्तार क्षेत्रीय और वैश्विक शक्ति संतुलन को गहराई से प्रभावित कर सकता है।
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