हैदराबाद। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu) ने सोमवार को सिकंदराबाद स्थित राष्ट्रपति निलयम (Presidential Palace) में अपना वार्षिक शीतकालीन प्रवास सफलतापूर्वक पूरा किया। राष्ट्रपति हकीमपेट वायुसेना स्टेशन से रवाना हुईं, जहाँ उन्हें राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा, मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी, केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी, मंत्री सीतक्का, सरकारी सलाहकार हरकारा वेंकटेश्वर राव, मुख्य सचिव रामकृष्ण राव तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने विदा किया। अपने प्रवास के दौरान राष्ट्रपति ने कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में भाग लिया।
भारत की आध्यात्मिक विरासत को बताया वैश्विक शांति का मार्ग
उन्होंने राज्य लोक सेवा आयोगों के अध्यक्षों के राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए पारदर्शिता और प्रशासनिक उत्कृष्टता पर जोर दिया। इसके अलावा, ब्रह्माकुमारी संस्था के “भारत का शाश्वत ज्ञान” सम्मेलन में मुख्य वक्तव्य देते हुए भारत की आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक शांति का मार्ग बताया। परंपरा के अनुसार, राष्ट्रपति ने रविवार को “एट होम” स्वागत समारोह आयोजित किया, जिसमें राज्य के गणमान्य व्यक्तियों और स्थानीय नेताओं ने भाग लिया।
नॉलेज गैलरी का भी किया निरीक्षण
उन्होंने 165 वर्ष पुराने ऐतिहासिक राष्ट्रपति निलयम के संरक्षण कार्यों, पुनर्स्थापित बावड़ियों और नॉलेज गैलरी का भी निरीक्षण किया। यह वार्षिक प्रवास केंद्र सरकार और दक्षिणी राज्यों के बीच सेतु का कार्य करता है तथा राष्ट्रीय राजधानी से बाहर राष्ट्रपति की उपस्थिति और आधिकारिक कार्यों को सुदृढ़ करता है।
द्रौपदी मुर्मू का इतिहास क्या है?
ओडिशा के मयूरभंज जिले में जन्मी द्रौपदी मुर्मू एक आदिवासी परिवार से आती हैं। उन्होंने शिक्षक और बाद में राजनेता के रूप में कार्य किया। ओडिशा सरकार में मंत्री रहीं, झारखंड की राज्यपाल बनीं और 2022 में राष्ट्रपति निर्वाचित होकर आदिवासी समुदाय से पहली राष्ट्रपति बनीं।
भारत के सबसे कम उम्र के राष्ट्रपति कौन थे?
भारत के सबसे कम उम्र के राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी थे। उन्होंने 1977 में 64 वर्ष की आयु में राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी। वे निर्विरोध राष्ट्रपति चुने गए थे और उनका कार्यकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में विशेष माना जाता है।
द्रौपदी मुर्मू कितने नंबर की राष्ट्रपति हैं?
द्रौपदी मुर्मू भारत की 15वीं राष्ट्रपति हैं। उन्होंने 25 जुलाई 2022 को राष्ट्रपति पद ग्रहण किया। वे इस पद पर पहुँचने वाली पहली आदिवासी महिला और दूसरी महिला राष्ट्रपति होने का गौरव रखती हैं।
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