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Afghanistan: अफगानिस्तान युद्ध और नाटो पर दिए बयान से बढ़ा कूटनीतिक तनाव

Dhanarekha
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Afghanistan: अफगानिस्तान युद्ध और नाटो पर दिए बयान से बढ़ा कूटनीतिक तनाव

अफगानिस्तान में सहयोगियों के बलिदान पर सवाल

लंदन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में एक इंटरव्यू में दावा किया कि अमेरिका को कभी नाटो गठबंधन की जरूरत नहीं थी और अफगानिस्तान(Afghanistan) में सहयोगी देशों के सैनिक मुख्य लड़ाई से दूर रहे थे। ट्रम्प के इस बयान पर ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर(Keir Starmer) ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे “अपमानजनक” करार दिया। उन्होंने कहा कि यह उन हजारों सैनिकों के बलिदान का निरादर है जिन्होंने युद्ध के मैदान में अपनी जान गँवाई। ब्रिटेन के प्रिंस हैरी, जो खुद दो बार अफगानिस्तान में तैनात रह चुके हैं, ने भी नाटो सैनिकों के सम्मान की रक्षा करने की बात कही है

नाटो के ‘अनुच्छेद 5’ और साझा इतिहास का हवाला

यूरोपीय देशों और ब्रिटेन ने ट्रम्प के दावों को सिरे से खारिज करते हुए याद दिलाया कि अफगानिस्तान(Afghanistan) में ‘इंटरनेशनल सिक्योरिटी असिस्टेंस फोर्स’ (ISAF) के तहत दर्जनों देशों ने मिलकर लड़ाई लड़ी थी। इस युद्ध में ब्रिटेन के 457 और कनाडा के 159 सैनिकों सहित कई यूरोपीय देशों ने अपने वीर योद्धाओं को खोया है। नाटो के अनुच्छेद 5 (एक पर हमला, सभी पर हमला) का इतिहास भी इसी एकजुटता पर टिका है। डच और पोलिश नेताओं ने भी ट्रम्प के बयान को “झूठा” और “हद पार करने वाला” बताया है।

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अमेरिका का नाटो से बाहर निकलने का डर और भविष्य

ट्रम्प लंबे समय से नाटो को अमेरिका पर एक “वित्तीय बोझ” मानते रहे हैं। उनका तर्क है कि यूरोपीय देश अपनी रक्षा पर जीडीपी का निर्धारित 2% खर्च नहीं कर रहे हैं और अमेरिका की सुरक्षा छतरी का मुफ्त लाभ उठा रहे हैं। विशेषज्ञों(Afghanistan) का मानना है कि यदि अमेरिका नाटो से बाहर निकलता है, तो यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी। रूस के पास लगभग 6,000 परमाणु हथियार हैं, जबकि ब्रिटेन और फ्रांस के पास मिलाकर केवल 500 हैं, ऐसे में बिना अमेरिकी सहयोग के यूरोप के लिए अपनी सीमाओं की रक्षा करना एक बड़ी चुनौती बन जाएगा।

नाटो का ‘अनुच्छेद 5’ क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

नाटो का अनुच्छेद 5 सामूहिक रक्षा का सिद्धांत है, जिसके तहत किसी एक सदस्य देश पर हमला होने पर उसे सभी सदस्यों पर हमला माना जाता है। यह गठबंधन की एकता और सुरक्षा की सबसे बड़ी गारंटी है।

अफगानिस्तान युद्ध में ब्रिटेन और अन्य सहयोगियों को कितना नुकसान उठाना पड़ा?

अफगानिस्तान(Afghanistan) में चले अभियानों के दौरान ब्रिटेन ने अपने 457 सैनिक खोए, जबकि कनाडा, फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों ने भी दर्जनों सैनिकों का बलिदान दिया। ट्रम्प के बयान को इन्हीं बलिदानों को कमतर दिखाने के तौर पर देखा जा रहा है।

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