नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग ने देश की मतदाता सूचियों को अधिक सटीक, पारदर्शी और अद्यतन बनाने के उद्देश्य से विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तीसरे चरण की प्रक्रिया तेज कर दी है। गुरुवार को आयोग ने शेष 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को एक महत्वपूर्ण पत्र भेजकर इस महत्वाकांक्षी परियोजना की तैयारियों की समीक्षा की। आधिकारिक संकेतों के अनुसार, इस विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया का अगला चरण अप्रैल 2026 से शुरू होने की संभावना है। आयोग ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि प्रारंभिक तैयारियां समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएं, ताकि मतदाता सूची से त्रुटियों को हटाकर एक शुद्ध और विश्वसनीय डेटाबेस तैयार किया जा सके।
पहले दो चरणों में 60 करोड़ मतदाता कवर
मतदाता सूची शुद्धिकरण का यह अभियान कई चरणों में विभाजित है। पहला चरण बिहार (Bihar) में लागू किया गया था, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए। इसके बाद अक्टूबर 2025 में दूसरे चरण की शुरुआत हुई, जिसमें 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया। इन दोनों चरणों के जरिए अब तक देश के लगभग 60 करोड़ मतदाताओं का डेटा कवर किया जा चुका है। वर्तमान में जिन 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आयोग ने संपर्क किया है, वहां करीब 39 करोड़ मतदाता पंजीकृत हैं। हालांकि, पिछले अनुभवों को देखते हुए यह संभावना जताई जा रही है कि आयोग सभी 22 क्षेत्रों को एक साथ शामिल करने के बजाय कुछ राज्यों को अगले चरणों के लिए सुरक्षित रख सकता है।
किन राज्यों पर विशेष फोकस?
तीसरे चरण की सूची में उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश (Himachal pradesh) जम्मू-कश्मीर, झारखंड और तेलंगाना जैसे बड़े राज्य शामिल हैं। इसके अलावा दिल्ली, लद्दाख और चंडीगढ़ जैसे केंद्र शासित प्रदेश भी इस दायरे में हैं। विशेष रूप से मणिपुर और उत्तराखंड जैसे राज्यों पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जहां विधानसभाओं का कार्यकाल मार्च 2027 में समाप्त हो रहा है।
उद्देश्य: त्रुटिहीन मतदाता सूची तैयार करना
इस प्रक्रिया का मुख्य मकसद मतदाता सूचियों से मृत, स्थायी रूप से स्थानांतरित या अयोग्य मतदाताओं के नाम हटाना है। साथ ही, पात्र नए मतदाताओं—खासकर युवाओं—के नाम जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। आयोग का मानना है कि साफ-सुथरी और अद्यतन मतदाता सूची लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मजबूती की बुनियाद है।
जनगणना 2027 से टकराव की चुनौती
तीसरे चरण के सामने सबसे बड़ी चुनौती जनगणना 2027 के प्रस्तावित कार्यक्रम से संभावित टकराव है। जनगणना के तहत हाउसलिस्टिंग यानी मकानों की सूची बनाने का कार्य 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच किया जाना है। दिल्ली, हरियाणा और ओडिशा जैसे राज्यों ने अपनी समय-सीमा अधिसूचित भी कर दी है। चूंकि दोनों प्रक्रियाओं में जमीनी स्तर पर बड़ी संख्या में कर्मचारियों और संसाधनों की जरूरत होती है, इसलिए राज्यों को या तो जनगणना की तारीखों में संशोधन करना होगा या निर्वाचन आयोग से अनुरोध करना होगा कि उन्हें अगले चरण में शामिल किया जाए।
2029 लोकसभा चुनाव से पहले अहम कवायद
आगामी विधानसभा चुनावों और 2029 के आम चुनावों को देखते हुए यह विशेष गहन पुनरीक्षण प्रशासनिक और राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि प्रक्रियाओं में विस्तार किया जाता है, तो तीसरे चरण का कार्य जून या जुलाई की शुरुआत तक बढ़ सकता है। अंततः, इस पूरी कवायद का लक्ष्य लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी—मतदाता सूची—को पूरी तरह त्रुटिहीन और विश्वसनीय बनाना है।
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