सीएम ने देवदुला लिफ्ट सिंचाई परियोजना का दौरा किया
हैदराबाद। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने रविवार को मुलुगु जिले के तूपाकुलगुडेम (tupakulgudem) स्थित देवदुला लिफ्ट सिंचाई परियोजना का दौरा कर निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। इस अवसर पर उन्होंने अधिकारियों से परियोजना की वर्तमान स्थिति और शेष कार्यों की जानकारी ली। बाद में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गोदावरी नदी के जल विवाद को पिछले कुछ वर्षों से राजनीतिक रंग दिया गया है। उन्होंने कहा कि यदि बीते दस वर्षों में लंबित परियोजनाएं पूरी कर ली गई होतीं तो आज दोनों तेलुगु राज्यों के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न नहीं होती। मुख्यमंत्री (Chief Minister) ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में कलेश्वरम परियोजना पर लगभग एक लाख दस हजार करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि अन्य सिंचाई परियोजनाओं की उपेक्षा की गई।

धन की कमी का करना पड़ रहा सामना
उन्होंने कहा कि अब राज्य को शेष परियोजनाओं और भूमि अधिग्रहण के लिए धन की कमी का सामना करना पड़ रहा है, फिर भी सरकार सभी कठिनाइयों को पार करते हुए अगले दो से तीन वर्षों में सभी लंबित परियोजनाएं पूरी करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि देवदुला परियोजना की प्रारंभिक लागत छह हजार करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर लगभग अठारह हजार करोड़ रुपये हो गई है। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि राज्य के प्रत्येक एकड़ को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। रेवंत रेड्डी ने कहा कि राज्य गठन के समय जल और धन दोनों की पर्याप्त उपलब्धता थी, किंतु स्वार्थपूर्ण राजनीति के कारण स्थिति बिगड़ गई। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ही परियोजना पर भारी व्यय किया गया और अन्य योजनाओं को अधूरा छोड़ दिया गया।

जल बंटवारे पर सरकार ने स्पष्ट जानकारी दी
उन्होंने कहा कि विधानसभा में कृष्णा नदी के जल बंटवारे पर सरकार ने स्पष्ट जानकारी दी है और पूर्ववर्ती शासनकाल की त्रुटियों को जनता के सामने रखा गया है। मुख्यमंत्री ने विपक्षी नेताओं को विधानसभा में खुली बहस की चुनौती देते हुए कहा कि दस वर्ष के उनके कार्यकाल और वर्तमान सरकार के ढाई वर्ष के कार्यों की तुलना सदन में की जाए। उन्होंने कहा कि रचनात्मक सुझावों का स्वागत किया जाएगा और चुनाव के समय ही राजनीति होनी चाहिए, जबकि राज्य के जल हितों के मामले में सभी दलों को एकजुट रहना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कृष्णा जल मुद्दे पर आंध्र प्रदेश के साथ किसी प्रकार के अनुचित सहयोग के आरोप निराधार और असत्य हैं।
लिफ्ट सिंचाई कैसे होती है?
इस पद्धति में पानी को नदी, झील या नहर जैसे निम्न स्रोत से पंपों की सहायता से ऊँचाई पर स्थित खेतों तक उठाया जाता है। जहां जमीन ऊँची होती है और गुरुत्वाकर्षण से पानी नहीं पहुंच पाता, वहां मोटर और पाइपलाइन का उपयोग किया जाता है। इससे सूखे या ऊंचे क्षेत्रों में भी खेती संभव हो पाती है। इस प्रणाली में बिजली और मजबूत पंप व्यवस्था आवश्यक होती है।

भारत में सबसे बड़ी लिफ्ट सिंचाई परियोजना कौन सी है?
देश की सबसे बड़ी लिफ्ट सिंचाई परियोजना Kaleshwaram Lift Irrigation Project मानी जाती है। यह Telangana में स्थित है और गोदावरी नदी के जल को ऊंचे क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए बनाई गई है। इस परियोजना के माध्यम से लाखों एकड़ भूमि की सिंचाई का लक्ष्य रखा गया है।
इंदिरा गांधी लिफ्ट परियोजना किस जिले में है?
Indira Gandhi Lift Canal Project मुख्य रूप से Sri Ganganagar जिले में स्थित है। यह परियोजना राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। इससे कृषि उत्पादन और पेयजल आपूर्ति में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है।
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