28 दिन में ₹41,000 की गिरावट
नई दिल्ली: शुक्रवार को भारतीय सर्राफा बाजार में सोने(Gold) और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोना ₹2,490 घटकर ₹1.44 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गया है, जबकि चांदी में ₹9,114 की भारी सेंध लगी है, जिससे यह ₹2.25 लाख प्रति किलो पर पहुंच गई है। पिछले 28 दिनों के आंकड़ों पर गौर करें तो ईरान जंग के शुरू होने के बाद से सोना करीब ₹15,000 और चांदी ₹41,000 सस्ती हो चुकी है। यह गिरावट निवेशकों द्वारा की जा रही ‘प्रॉफिट बुकिंग’ और नकदी (Cash) बचाने की होड़ का नतीजा है।
बाजार गिरने के पीछे का गणित
आमतौर पर युद्ध(War) जैसी स्थितियों में सोने के दाम बढ़ते हैं, लेकिन इस बार रुझान विपरीत है। विशेषज्ञ इसके पीछे तीन मुख्य कारण बता रहे हैं: पहला, अनिश्चितता के दौर में लोग सोने में पैसा फंसाने के बजाय ‘लिक्विड कैश’ रखना पसंद कर रहे हैं। दूसरा, जनवरी में जब कीमतें(Gold) अपने ऑल-टाइम हाई (सोना ₹1.76 लाख और चांदी ₹3.86 लाख) पर थीं, तब बड़े निवेशकों ने अपना स्टॉक बेचकर मुनाफा कमाना शुरू किया, जिससे बाजार में सप्लाई बढ़ गई। तीसरा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों पर सख्त रुख अपनाने से भी कीमती धातुओं की चमक फीकी हुई है।
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खरीदारों के लिए जरूरी सलाह
यदि आप इस गिरावट का फायदा उठाकर गहने या निवेश के लिए सोना(Gold) खरीदने की सोच रहे हैं, तो सावधानी बरतना जरूरी है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, बाजार में यह गिरावट अभी और जारी रह सकती है, इसलिए जल्दबाजी में बड़ा निवेश करने से बचें। खरीदारी करते समय हमेशा BIS हॉलमार्क (जैसे 6 अंकों का HUID नंबर) जरूर चेक करें ताकि शुद्धता की गारंटी मिल सके। साथ ही, अलग-अलग शहरों में ट्रांसपोर्टेशन और स्थानीय टैक्स के कारण कीमतों में अंतर हो सकता है, इसलिए ‘इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन’ (IBJA) की वेबसाइट से भाव क्रॉस-चेक जरूर करें।
क्या यह सोना-चांदी खरीदने का सही समय है?
कमोडिटी एक्सपर्ट्स के अनुसार, बाजार में अभी और अस्थिरता रह सकती है। यदि आप लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं तो किश्तों में खरीदारी कर सकते हैं, लेकिन एकमुश्त बड़ा निवेश करने से पहले बाजार के स्थिर होने का इंतजार करना बेहतर होगा।
अलग-अलग शहरों में सोने के दाम अलग क्यों होते हैं?
इसके चार मुख्य कारण हैं-शहरों के बीच ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी का खर्च, स्थानीय ज्वेलरी एसोसिएशन द्वारा तय किए गए रेट, राज्य सरकारों द्वारा लगाया जाने वाला अलग-अलग टैक्स और ज्वेलर्स के पास मौजूद पुराने स्टॉक की खरीद कीमत।
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