Metformin research : कई दशकों से Type 2 Diabetes के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली सबसे आम और सस्ती दवाओं में से एक है। दुनिया भर में करोड़ों लोग इस दवा का उपयोग ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए करते हैं। हाल ही में आई एक नई रिसर्च ने इस दवा के प्रभाव को लेकर कुछ अहम जानकारी सामने रखी है।
हाल में Science Advances में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार मेटफॉर्मिन सिर्फ ब्लड शुगर को नियंत्रित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे दिमाग को भी प्रभावित कर सकती है। आमतौर पर माना जाता है कि डायबिटीज की दवाएं लीवर या पैनक्रियास पर असर डालती हैं, लेकिन इस नई खोज ने वैज्ञानिकों को एक नया दृष्टिकोण दिया है।
दिमाग पर कैसे असर डालती है?
शोध के अनुसार यह दवा दिमाग के हाइपोथैलेमस नामक हिस्से को प्रभावित करती है। यह हिस्सा शरीर की ऊर्जा और ग्लूकोज संतुलन को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मेटफॉर्मिन SF1 न्यूरॉन्स को सक्रिय करके Rap1 नामक प्रोटीन को दबाती है, जिससे ब्लड शुगर कम करने में मदद मिलती है।
दिलचस्प बात यह है कि बहुत कम मात्रा में भी यह दवा जब दिमाग तक पहुंचती है तो इसका असर काफी प्रभावी होता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस खोज से डायबिटीज के इलाज के नए रास्ते खुल सकते हैं।
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सावधानी भी जरूरी
हालांकि इस शोध के साथ कुछ चिंताएं भी सामने आई हैं। अगर यह दवा (Metformin research) दिमाग पर असर डालती है तो लंबे समय में याददाश्त और संज्ञानात्मक क्षमता पर इसका क्या प्रभाव होगा, इस पर अभी और अध्ययन की जरूरत है। कुछ अध्ययनों में यह पाया गया है कि मेटफॉर्मिन डिमेंशिया के खतरे को कम कर सकती है, जबकि कुछ में बुजुर्गों में मानसिक क्षमता कम होने की आशंका जताई गई है।
इसके अलावा लंबे समय तक मेटफॉर्मिन लेने से विटामिन B12 की कमी हो सकती है। बहुत ही दुर्लभ मामलों में लैक्टिक एसिडोसिस जैसी समस्या भी देखी गई है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि मरीजों को घबराने की जरूरत नहीं है और डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद नहीं करनी चाहिए। नियमित जांच और सावधानी के साथ यह दवा अभी भी डायबिटीज के इलाज में सबसे सुरक्षित विकल्पों में से एक मानी जाती है।
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