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Russia: रूस का बड़ा फैसला: 1 अप्रैल से पेट्रोल निर्यात पर पूरी तरह रोक

Dhanarekha
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Russia: रूस का बड़ा फैसला: 1 अप्रैल से पेट्रोल निर्यात पर पूरी तरह रोक

चीन और तुर्की को झटका

मास्को: रूस(Russia) की पुतिन सरकार ने घोषणा की है कि वह 1 अप्रैल से गैसोलीन (पेट्रोल) के निर्यात पर प्रतिबंध लगा देगी। उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य रूसी घरेलू बाजार में ईंधन(Fuel) की आपूर्ति को स्थिर करना और कीमतों को बढ़ने से रोकना है। मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मची है, जिसे देखते हुए रूस ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है

चीन और तुर्की पर बड़ा असर, भारत सुरक्षित

रूस के इस फैसले का सबसे बड़ा असर चीन और तुर्की जैसे देशों पर पड़ेगा, जो रूसी पेट्रोलियम उत्पादों के बड़े खरीदार हैं। इन देशों को अब वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करनी होगी, जिससे उनकी अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि भारत पर इसका खास असर नहीं होगा। इसका मुख्य कारण यह है कि भारत रूस से मुख्य रूप से कच्चा तेल (Crude Oil) आयात करता है, न कि रिफाइंड पेट्रोल (Gasoline)। भारत अपनी रिफाइनिंग क्षमता के मामले में आत्मनिर्भर है, इसलिए गैसोलीन निर्यात पर रोक से भारत की सेहत पर फर्क नहीं पड़ेगा।

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वैश्विक ऊर्जा संकट और भविष्य की रणनीति

रूस की रिफाइनरियां वर्तमान में अपनी पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और उनके पास पर्याप्त भंडार है, लेकिन भविष्य की अनिश्चितताओं को देखते हुए यह ‘प्रिवेंटिव’ कदम उठाया गया है। वैश्विक तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच रूस का यह फैसला दिखाता है कि प्रमुख ऊर्जा उत्पादक देश अब बाहरी मांग के बजाय अपनी आंतरिक अर्थव्यवस्था को बचाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। यह कदम अन्य तेल निर्यातक देशों को भी अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर सकता है।

रूस ने गैसोलीन निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का फैसला क्यों लिया है?

यह फैसला रूस ने घरेलू बाजार में पेट्रोल की सप्लाई सुनिश्चित करने और ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने के लिए लिया है, ताकि वैश्विक ऊर्जा संकट का असर उनके आम नागरिकों पर न पड़े।

क्या इस प्रतिबंध से भारत में पेट्रोल की कीमतों पर कोई असर पड़ेगा?

नहीं, भारत पर इसका खास असर नहीं होगा क्योंकि भारत रूस से कच्चा तेल आयात करता है और अपनी जरूरत का पेट्रोल खुद रिफाइन करता है। भारत रूस से गैसोलीन (रिफाइंड पेट्रोल) का बड़ा आयातक नहीं है।

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