नई दिल्ली। देश में दूध की बिक्री और गुणवत्ता को लेकर अब निगरानी और कड़ी होने जा रही है। सरकार ने साफ कर दिया है कि बिना रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस के दूध बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इस संबंध में (Food Safety and Standards Authority of India) ने दूध उत्पादकों और वेंडरों के लिए नई एडवाइजरी जारी की है।नई व्यवस्था के तहत जो दूध उत्पादक किसी डेयरी सहकारी समिति से जुड़े नहीं हैं और जो लोग सीधे उपभोक्ताओं को दूध बेचते हैं, उन्हें अब FSSAI के तहत रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा।
बिना रजिस्ट्रेशन कारोबार पर बढ़ी चिंता
11 मार्च को जारी एडवाइजरी में FSSAI ने कहा कि कई क्षेत्रों में यह पाया गया है कि कुछ दूध उत्पादक और विक्रेता बिना किसी वैध लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन के ही कारोबार कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए अब इन सभी को नियमों के तहत रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इससे दूध की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
इन किसानों को नहीं लेना होगा अलग लाइसेंस
FSSAI के मुताबिक जो किसान किसी डेयरी कोऑपरेटिव सोसाइटी के सदस्य हैं और अपना पूरा दूध उसी संस्था को उपलब्ध कराते हैं, उन्हें अलग से रजिस्ट्रेशन कराने की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि जो लोग सीधे बाजार या ग्राहकों को दूध बेचते हैं, उनके लिए लाइसेंस लेना जरूरी होगा।
मिलावट रोकने के लिए सख्ती
खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण ने बताया कि हाल के समय में कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से दूध में मिलावट के मामले सामने आए हैं। इसी को देखते हुए नियमों को सख्ती से लागू करने का फैसला लिया गया है। केंद्र और राज्य सरकार के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे जांच करें कि दूध बेचने वाले उत्पादकों और वेंडरों के पास वैध रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस मौजूद है या नहीं। नियमों का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
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दूध स्टोरेज सिस्टम की भी होगी जांच
सिर्फ लाइसेंस ही नहीं, बल्कि दूध के सुरक्षित भंडारण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे दूध रखने वाले चिलर और स्टोरेज सिस्टम की समय-समय पर जांच करें, ताकि सही तापमान बना रहे और दूध खराब होने से बचाया जा सके। इसके अलावा FSSAI ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष रजिस्ट्रेशन अभियान चलाने के लिए भी कहा है, ताकि जो दूध उत्पादक और विक्रेता अब तक पंजीकृत नहीं हैं, वे जल्द से जल्द लाइसेंस प्राप्त कर सकें और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
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