Crisis Hits: LPG संकट की मार: ₹4000 का सिलेंडर और खाने-पीने की चीजों के दाम दोगुने

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ईंधन की किल्लत और महंगाई का चक्र

नई दिल्ली: ईरान, इजराइल और अमेरिका(America) के बीच जारी संघर्ष ने वैश्विक गैस सप्लाई चेन(Crisis Hits) को तोड़ दिया है। भारत में एलपीजी की भारी कमी के कारण घरेलू सिलेंडर जहाँ ₹4000 के पार पहुँच गया है, वहीं कमर्शियल सिलेंडर के लिए ₹5000 से अधिक वसूले जा रहे हैं। इस बेतहाशा वृद्धि का सीधा असर आम खाद्य पदार्थों पर पड़ा है; ₹10 वाली चाय अब ₹15 की हो गई है और ₹100 वाली मोमोज की प्लेट ₹200 में मिल रही है

छोटे व्यापारियों और होटल इंडस्ट्री पर संकट

गैस की किल्लत ने रेस्तरां, ढाबों(Dhabas) और स्ट्रीट फूड स्टॉल संचालकों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है। नोएडा और दिल्ली जैसे इलाकों में कई फूड स्टॉल बंद(Crisis Hits) हो चुके हैं, क्योंकि सिलेंडर या तो मिल नहीं रहे या उनकी कीमत चुकाना मुमकिन नहीं है। समोसा, ब्रेड पकोड़ा और बिरयानी जैसी चीजों की कीमतों में 50% से 100% तक का उछाल आया है, जिससे आम ग्राहकों की संख्या में भी भारी गिरावट देखी जा रही है।

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सरकार का पक्ष और तकनीकी चुनौतियाँ

पेट्रोलियम राज्य मंत्री सुरेश गोपी के अनुसार, सरकार वैकल्पिक स्रोतों से एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रयास कर रही है। हालांकि, हॉर्मुज जलडमरूमध्य(Crisis Hits) जैसे तकनीकी और भू-राजनीतिक पहलू भारत के नियंत्रण से बाहर होने के कारण आपूर्ति बहाल होने में समय लग रहा है। मंत्रालय ने आश्वासन दिया है कि स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास जारी हैं, लेकिन जमीन पर फिलहाल जनता को राहत मिलती नहीं दिख रही है।

एलपीजी की कमी का असर स्ट्रीट फूड और छोटे दुकानदारों पर कैसे पड़ रहा है?

गैस की कमी और कालाबाजारी के कारण दुकानदारों को घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर 4 से 5 गुना अधिक दाम पर खरीदने पड़ रहे हैं। इस बढ़ी हुई लागत की भरपाई के लिए उन्होंने चाय, समोसे, मोमोज और बिरयानी जैसे उत्पादों के दाम दोगुने कर दिए हैं, जिससे कई दुकानों में ताला लग गया है और बेरोजगारी बढ़ रही है।

सरकार इस संकट को दूर करने के लिए क्या कदम उठा रही है?

पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, भारत अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अन्य अंतरराष्ट्रीय देशों से बातचीत कर रहा है और वैकल्पिक रास्ते तलाश रहा है। सरकार का दावा है कि स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास जारी हैं, हालांकि अंतरराष्ट्रीय युद्ध की स्थिति एक बड़ी तकनीकी बाधा बनी हुई है।

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