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E-Commerce: ई-कॉमर्स दिग्गजों पर गाज

Dhanarekha
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E-Commerce: ई-कॉमर्स दिग्गजों पर गाज

अवैध वॉकी-टॉकी बिक्री पर ₹44 लाख का जुर्माना

नई दिल्ली: केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (E-Commerce) ने नियमों के उल्लंघन को लेकर अमेजन, फ्लिपकार्ट, मीशो और मेटा (फेसबुक) समेत 8 प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनियों पर ₹44 लाख का जुर्माना लगाया है। जांच में पाया गया कि ये प्लेटफॉर्म बिना वैध लाइसेंस और जरूरी तकनीकी मंजूरी (ETA) के वॉकी-टॉकी बेच रहे थे। अमेजन, फ्लिपकार्ट, मीशो और मेटा पर ₹10-10 लाख की पेनाल्टी लगाई गई है, जबकि जियोमार्ट और अन्य छोटी कंपनियों पर ₹1-1 लाख का जुर्माना लगा है। यह कार्रवाई उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत की गई है

सुरक्षा मानकों और फ्रीक्वेंसी का उल्लंघन

भारत में वायरलेस उपकरणों के लिए कड़े नियम हैं। नियमों के अनुसार, बिना लाइसेंस के केवल 446.0 से 446.2 मेगाहर्ट्ज (MHz) की फ्रीक्वेंसी वाले वॉकी-टॉकी ही इस्तेमाल किए जा सकते हैं। हालांकि, ई-कॉमर्स साइट्स पर बिकने वाले 16,970 से अधिक उत्पाद इस सीमा का उल्लंघन कर रहे थे। ये उपकरण बिना ‘इक्विपमेंट टाइप अप्रूवल’ (E-Commerce) के बेचे जा रहे थे, जो पुलिस और आपातकालीन सेवाओं के रेडियो नेटवर्क में बाधा डाल सकते हैं। सरकार ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा माना है।

कंपनियों की जवाबदेही और नई गाइडलाइंस

सुनवाई के दौरान कंपनियों ने ‘मध्यस्थ’ होने का तर्क दिया, जिसे CCPA ने खारिज कर दिया। प्राधिकरण का स्पष्ट कहना है कि प्लेटफॉर्म अपनी लिस्टिंग की जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। इसी को देखते हुए ‘नई गाइडलाइंस-2025’ जारी की गई हैं। अब ई-कॉमर्स(E-Commerce) कंपनियों को किसी भी रेडियो उपकरण को लिस्ट करने से पहले उसका फ्रीक्वेंसी डेटा और सर्टिफिकेट जांचना अनिवार्य होगा। साथ ही, उन्हें अवैध उत्पादों को रोकने के लिए अपने प्लेटफॉर्म पर ऑटोमैटिक फिल्टर सिस्टम लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

वॉकी-टॉकी की अवैध बिक्री को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ के लिए खतरा क्यों माना गया है?

वॉकी-टॉकी रेडियो फ्रीक्वेंसी पर काम करते हैं। यदि ये उपकरण सरकार द्वारा निर्धारित फ्रीक्वेंसी (446 MHz) के बाहर काम करते हैं, तो ये पुलिस, सेना, विमानन(E-Commerce) और आपदा प्रबंधन सेवाओं के सुरक्षित संचार नेटवर्क में हस्तक्षेप कर सकते हैं। इससे महत्वपूर्ण सरकारी ऑपरेशन्स में रुकावट आ सकती है और संवेदनशील सूचनाएं लीक होने का डर रहता है, इसीलिए इन्हें सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया है।

‘इक्विपमेंट टाइप अप्रूवल’ (ETA) क्या है और यह क्यों जरूरी है?

ETA एक अनिवार्य प्रमाण पत्र है जो दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा जारी किया जाता है। यह प्रमाणित करता है कि कोई भी वायरलेस उपकरण (जैसे वॉकी-टॉकी, ब्लूटूथ डिवाइस आदि) भारत के तकनीकी मानकों और निर्धारित फ्रीक्वेंसी के दायरे में काम कर रहा है। बिना ETA के वायरलेस डिवाइस बेचना या इस्तेमाल करना गैरकानूनी है क्योंकि यह देश के टेलीकॉम बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा सकता है।

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