EPFO: EPFO का ‘ई-प्राप्ति’ पोर्टल और ₹7500 पेंशन

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करोड़ों कर्मचारियों को मिलेगी बड़ी राहत

नई दिल्ली: ईपीएफओ(EPFO) जल्द ही ‘ई-प्राप्ति’ (E-Prapti) नाम का एक नया डिजिटल पोर्टल लॉन्च करने जा रहा है। यह पोर्टल उन लाखों लोगों के लिए वरदान साबित होगा जिनके पुराने पीएफ अकाउंट्स इन-एक्टिव (In-operative) पड़े हैं और जिनके पास अपना यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) भी नहीं है। वर्तमान में ईपीएफओ के पास लगभग 31.8 लाख ऐसे खाते हैं जो सालों से बंद हैं। नए पोर्टल के जरिए लोग केवल अपने आधार कार्ड का उपयोग करके इन खातों को ट्रैक कर सकेंगे और फंसा हुआ पैसा सीधे अपने मौजूदा बैंक खाते में मंगा सकेंगे

मिनिमम मंथली पेंशन में 7 गुना से ज्यादा बढ़ोतरी की तैयारी

एंप्लॉई पेंशन स्कीम (EPS-95) के तहत रिटायर होने वाले कर्मचारियों के लिए दूसरी बड़ी खबर पेंशन राशि को लेकर है। वर्तमान में न्यूनतम पेंशन केवल ₹1,000 प्रति महीना है, जिसे महंगाई के दौर में नाकाफी बताया जा रहा है। लेबर यूनियंस और पेंशनर्स एसोसिएशन की मांग पर एक पार्लियामेंट्री कमेटी ने न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर ₹7,500 करने की सिफारिश को मंजूरी दे दी है। सरकार के इस संभावित फैसले से उन लाखों बुजुर्गों को बड़ा आर्थिक संबल मिलेगा जो लंबे समय से इसकी मांग कर रहे थे।

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छोटा बैलेंस और ऑटो-सेटलमेंट की सुविधा

ईपीएफओ ने उन खातों के लिए ‘ऑटो-सेटलमेंट’ (Auto-settlement) प्रक्रिया भी शुरू करने का फैसला लिया है जिनमें ₹1,000 से कम की राशि जमा है। अब ऐसे खाताधारकों को छोटी रकम निकालने के लिए किसी लंबी कागजी कार्यवाही या दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं होगी; यह पैसा सीधे उनके लिंक किए गए बैंक खाते में भेज दिया जाएगा। इसके साथ ही, नियम यह भी स्पष्ट किया गया है कि 55 साल की उम्र के बाद यदि खाते में 3 साल तक कोई नया योगदान नहीं आता है, तो उसे ‘इन-ऑपरेटिव’ मानकर उस पर ब्याज देना बंद कर दिया जाएगा।

‘ई-प्राप्ति’ पोर्टल किन लोगों के लिए उपयोगी है?

यह पोर्टल विशेष रूप से उन लोगों के लिए है जिनके पीएफ खाते पुराने हैं और उनके पास UAN नंबर नहीं है। यदि किसी का खाता 5 से 20 साल पुराना है और फिजिकल मोड में था, तो वे आधार वेरिफिकेशन के जरिए अपना पैसा इस पोर्टल से ट्रैक कर सकेंगे।

कोई पीएफ अकाउंट ‘इन-ऑपरेटिव’ कब घोषित किया जाता है?

यदि कोई कर्मचारी 55 वर्ष की आयु के बाद रिटायर हो जाता है और उसके पीएफ खाते में लगातार 3 वर्षों तक कोई नया अंशदान (Contribution) जमा नहीं होता है, तो उस खाते को ‘इन-ऑपरेटिव’ माना जाता है और उस पर ब्याज मिलना बंद हो जाता है।

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Dhanarekha

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