India’s Space Sector: भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में नया इतिहास

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स्काईरूट एयरोस्पेस बनी देश की पहली स्पेसटेक ‘यूनिकॉर्न’

हैदराबाद: हैदराबाद स्थित स्टार्टअप ‘स्काईरूट एयरोस्पेस’ ने 60 मिलियन डॉलर (करीब ₹500 करोड़) की ताज़ा फंडिंग जुटाकर भारतीय स्पेस सेक्टर(India’s Space Sector) में अपना दबदबा साबित कर दिया है। इस निवेश के साथ ही कंपनी की कुल वैल्यूएशन 1.1 बिलियन डॉलर (करीब ₹10,000 करोड़) पहुँच गई है, जिससे यह देश का पहला ‘स्पेसटेक यूनिकॉर्न’ बन गया है। इस फंडिंग राउंड का नेतृत्व शेरपालो वेंचर्स और GIC जैसे बड़े निवेशकों ने किया है, साथ ही गूगल के शुरुआती निवेशक राम श्रीराम भी अब कंपनी के बोर्ड में शामिल होंगे

विक्रम-1 की लॉन्चिंग और भविष्य की योजनाएं

कंपनी इस समय अपने पहले ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ के लॉन्च की अंतिम तैयारियों में जुटी है। रॉकेट के महत्वपूर्ण हिस्सों को पहले ही श्रीहरिकोटा भेज दिया गया है और आने वाले कुछ हफ्तों में इसकी पहली उड़ान संभावित है। CEO पवन कुमार चंदाना के अनुसार, नई फंडिंग का मुख्य उद्देश्य विक्रम-1 के नियमित लॉन्च की व्यवस्था करना, मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को बढ़ाना और अगले चरण के रॉकेट ‘विक्रम-2’ का विकास करना है, जो 1,000 किलोग्राम तक का भार ले जाने में सक्षम होगा।

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इसरो (ISRO) से यूनिकॉर्न तक का सफर

स्काईरूट की नींव 2018 में इसरो के दो पूर्व वैज्ञानिकों, पवन कुमार चंदाना और नागा भरत डाका ने रखी थी। कंपनी ने 2022 में भारत के पहले निजी रॉकेट ‘विक्रम-S’ को सफलतापूर्वक लॉन्च कर वैश्विक ध्यान आकर्षित किया था। स्टार्टअप का दावा है कि वे दुनिया की सबसे सस्ती सैटेलाइट लॉन्च सेवाएं प्रदान करेंगे। ‘यूनिकॉर्न’ का दर्जा मिलना न केवल स्काईरूट के लिए बल्कि भारत के पूरे निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, जो वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता रखता है।

स्काईरूट एयरोस्पेस ने हाल ही में कितनी फंडिंग जुटाई है और उसका मुख्य उपयोग क्या होगा?

करीब ₹500 करोड़ (60 मिलियन डॉलर) की फंडिंग स्काईरूट ने जुटाई है। इसका उपयोग विक्रम-1 रॉकेट के नियमित लॉन्च, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और एडवांस ‘विक्रम-2’ रॉकेट के विकास के लिए किया जाएगा।

‘यूनिकॉर्न’ स्टार्टअप से क्या अभिप्राय है?

जब किसी निजी स्टार्टअप कंपनी की मार्केट वैल्यूएशन 1 बिलियन डॉलर (भारतीय मुद्रा में करीब ₹9,400 करोड़ से ₹10,000 करोड़) या उससे अधिक हो जाती है, तो उसे व्यापारिक जगत में ‘यूनिकॉर्न’ कहा जाता है।

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Dhanarekha

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