IT: IT सेक्टर में हलचल: कॉग्निजेंट में बड़े पैमाने पर छंटनी की तैयारी

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15,000 कर्मचारियों पर असर और भारत में सबसे बड़ी मार

नई दिल्ली: IT दिग्गज कॉग्निजेंट अपने वर्कफोर्स में बड़ी कटौती करने की योजना बना रही है, जिससे दुनिया भर में लगभग 12,000 से 15,000 कर्मचारियों की नौकरी जा सकती है। रिपोर्टों के अनुसार, इस छंटनी(Layoffs) का सबसे ज्यादा असर भारत पर पड़ेगा, क्योंकि कंपनी के कुल 3.57 लाख कर्मचारियों में से लगभग 2.50 लाख (करीब 70%) भारत में ही कार्यरत हैं। ओरेकल और अमेजन के बाद इसे इस साल की सबसे बड़ी टेक छंटनी माना जा रहा है, जो मुख्य रूप से बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद जैसे बड़े हब को प्रभावित करेगी

‘प्रोजेक्ट लीप’ और सेवरेंस पैकेज का भारी बजट

कंपनी ने अपनी इस पुनर्गठन प्रक्रिया को ‘प्रोजेक्ट लीप’ का नाम दिया है। तिमाही नतीजों के दौरान कंपनी ने खुलासा किया कि वह कर्मचारियों को हटाते समय दिए जाने वाले मुआवजे (सेवरेंस पे) पर 230 मिलियन से 320 मिलियन डॉलर (लगभग ₹2,600 करोड़ तक) खर्च करने की उम्मीद कर रही है। भारत(India) में कर्मचारियों की औसत सैलरी के हिसाब से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बजट से केवल भारत में ही 12,000 से ज्यादा कर्मचारियों का सेवरेंस पैकेज कवर किया जा सकता है।

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बदलता बिजनेस मॉडल और ‘छोटा पिरामिड’ विजन

छंटनी के पीछे का मुख्य कारण क्लाइंट्स की बदलती पसंद और कंपनी का नया स्ट्रक्चरल मॉडल है। CEO रवि कुमार एस के अनुसार, कंपनी अब पुराने ‘स्टाफिंग पिरामिड’ (जहाँ बड़ी संख्या में फ्रेशर्स होते थे) के बजाय एक छोटे और अधिक कुशल पिरामिड की ओर बढ़ रही है। अब कंपनियाँ डिजिटल लेबर और ह्यूमन लेबर के मिश्रण पर ध्यान दे रही हैं। क्लाइंट्स अब फ्रेशर्स की ट्रेनिंग पर भारी खर्च करने के बजाय तैयार और अनुभवी कार्यबल को प्राथमिकता दे रहे हैं।

‘सेवरेंस पे’ क्या होता है और कॉग्निजेंट इस पर कितना खर्च कर रही है?

जब कोई कंपनी किसी कर्मचारी को उसकी गलती के बिना नौकरी से निकालती है, तो उसे दी जाने वाली आर्थिक सहायता को ‘सेवरेंस पे’ कहते हैं। कॉग्निजेंट ने इसके लिए 230 मिलियन से 320 मिलियन डॉलर का बजट रखा है, जो कर्मचारियों के मुआवजे और अन्य लाभों में इस्तेमाल होगा।

कॉग्निजेंट के नए ‘स्टाफिंग मॉडल’ का लक्ष्य क्या है?

कंपनी के CEO के अनुसार, वे एक ‘व्यापक और छोटे पिरामिड’ की ओर बढ़ रहे हैं। इसका लक्ष्य एंट्री-लेवल कर्मचारियों पर निर्भरता कम करना और इंसानी श्रम (Human Labor) के साथ डिजिटल तकनीक का बेहतर तालमेल बिठाकर दक्षता बढ़ाना है।

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