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Gold: सोने-चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ उछाल

Dhanarekha
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Gold: सोने-चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ उछाल

कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी और मुख्य कारण

नई दिल्ली: जनवरी 2026 में कीमती धातुओं(Gold) ने अपने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। चांदी महज दो दिनों में ₹20,000 महंगी होकर ₹2.63 लाख प्रति किलो के करीब पहुंच गई है, जबकि सोना ₹1.40 लाख प्रति 10 ग्राम के पार निकल गया है। इस तेजी के पीछे वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव(Geopolitical Tensions) (रूस-यूक्रेन युद्ध), डॉलर की कमजोरी और चीन जैसे देशों के केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़े पैमाने पर की जा रही खरीदारी मुख्य वजह है। निवेशकों के लिए इस अस्थिर माहौल में सोना अब भी सबसे सुरक्षित विकल्प बना हुआ है

चांदी की बढ़ती औद्योगिक मांग और भविष्य का अनुमान

चांदी की कीमतों में सोने(Gold) के मुकाबले कहीं अधिक तेजी (वर्ष 2025 में 167% की वृद्धि) देखी गई है। इसका सबसे बड़ा कारण चांदी का ‘इंडस्ट्रियल मेटल’ के रूप में उभरना है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और इलेक्ट्रॉनिक्स में चांदी का इस्तेमाल अनिवार्य होता जा रहा है। विशेषज्ञों, जैसे केडिया एडवाइजरी का मानना है कि मांग और आपूर्ति के इस अंतर के कारण चांदी इस साल ₹2.75 लाख तक जा सकती है, जो इसे केवल आभूषण नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण कच्चा माल बनाता है।

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शुद्धता की पहचान और कीमतों में अंतर का गणित

आम ग्राहकों के लिए यह समझना जरूरी है कि IBJA द्वारा जारी रेट्स में GST और मेकिंग चार्ज शामिल नहीं होते, इसलिए अलग-अलग शहरों और शोरूम्स में कीमतें भिन्न हो सकती हैं। साथ ही, भारी निवेश के समय चांदी की शुद्धता जांचना(Gold) भी आवश्यक है। असली चांदी की पहचान के लिए मैग्नेट टेस्ट (चुंबक से न चिपकना) और आइस टेस्ट (बर्फ का तेजी से पिघलना) जैसे सरल तरीके अपनाए जा सकते हैं। सोने की कीमतों के भी इस साल के अंत तक ₹1.50 लाख तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

चांदी की कीमतों में सोने के मुकाबले ज्यादा तेजी क्यों आ रही है?

चांदी की कीमतों में अधिक उछाल का मुख्य कारण इसकी दोहरी भूमिका है। सोना(Gold) जहां मुख्य रूप से निवेश और आभूषण के लिए उपयोग होता है, वहीं चांदी एक अनिवार्य औद्योगिक धातु बन चुकी है। सोलर एनर्जी, चिप निर्माण और इलेक्ट्रिक वाहनों में इसकी भारी खपत हो रही है। साथ ही, वैश्विक स्तर पर सप्लाई कम होने और कंपनियों द्वारा भविष्य के लिए स्टॉक जमा करने (होल्डिंग) के कारण चांदी की कीमतों में सोने से कहीं ज्यादा (167% वार्षिक) वृद्धि देखी गई है।

क्या आम आदमी के लिए अभी भी सोने-चांदी में निवेश करना सही है?

विशेषज्ञों के अनुसार, सोने और चांदी की मांग में गिरावट के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। वैश्विक तनाव और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी के कारण सोने के ₹1.50 लाख और चांदी के ₹2.75 लाख तक जाने का अनुमान है। हालांकि, कीमतें अपने ‘ऑल टाइम हाई’ पर हैं, इसलिए निवेशकों को ‘सिप’ (SIP) या टुकड़ों में निवेश करने की सलाह दी जाती है ताकि बाजार के उतार-चढ़ाव का जोखिम कम हो सके।

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