बचत और तकनीक का नया समीकरण
नई दिल्ली: इंडक्शन(Induction) चूल्हा पारंपरिक इलेक्ट्रिक हीटर या गैस चूल्हे से बिल्कुल अलग तरीके से काम करता है। इसमें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तकनीक का उपयोग होता है, जिससे बर्तन खुद ही गर्मी का स्रोत बन जाता है। जहां गैस चूल्हा केवल 40 से 55% ऊर्जा का उपयोग कर पाता है, वहीं इंडक्शन 85 से 90% तक एफिशिएंट होता है। इसका मतलब है कि इसमें गर्मी का नुकसान बहुत कम होता है और खाना तेजी से पकता है।
बिजली की खपत और महीने का खर्च
इंडक्शन(Induction) इस्तेमाल करने पर सबसे बड़ी चिंता बिजली बिल की होती है। सामान्यतः, एक घंटे इंडक्शन चलाने पर 1 से 2 यूनिट बिजली खर्च होती है। यदि एक 4 सदस्यों वाला परिवार रोजाना 2 से 3 घंटे इस पर खाना बनाता है, तो महीने का खर्च लगभग ₹700 के करीब आता है। इसकी तुलना में एक घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत वर्तमान(Present) में ₹900 से ₹1000 के बीच है। इस गणित से इंडक्शन का उपयोग गैस(Gas) के मुकाबले सस्ता और किफायती साबित होता है।
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बाजार में कीमत और स्मार्ट चुनाव
इंडक्शन चूल्हे की शुरुआती कीमत बाजार में ₹1,000 से शुरू हो जाती है। हालांकि, बेहतर सुरक्षा फीचर्स और अधिक पावर क्षमता वाले ब्रांडेड मॉडल ₹2,000 से ₹3,000 के बीच मिलते हैं। इसे खरीदने समय इसके ‘वॉटेज’ (Wattage) और कूकिंग मोड्स (जैसे फ्राइंग, बॉयलिंग, वार्मिंग) को जरूर चेक करना चाहिए। यह निवेश न केवल मौजूदा गैस संकट में राहत देगा, बल्कि भविष्य के लिए भी एक सुरक्षित और सस्ता विकल्प बनेगा।
क्या इंडक्शन चूल्हा गैस सिलेंडर से सस्ता पड़ता है?
हाँ, गणना के अनुसार यदि आप महीने भर इंडक्शन पर खाना पकाते हैं, तो बिजली का बिल लगभग ₹700 आएगा, जबकि एक एलपीजी सिलेंडर की औसत कीमत ₹900-₹1000 है। इस तरह इंडक्शन के उपयोग से हर महीने ₹200-₹300 की बचत हो सकती है।
इंडक्शन पर खाना बनाने के लिए यूनिट्स निकालने का फॉर्मूला क्या है?
बिजली की खपत निकालने का सरल फॉर्मूला है: यूनिट (kWh) = (वॉटेज × समय) ÷ 1000। उदाहरण के लिए, यदि आप 2000 वॉट का इंडक्शन 1 घंटा चलाते हैं, तो यह 2 यूनिट बिजली खर्च करेगा।
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