युद्ध, कालाबाजारी और बढ़ती कीमतें
नई दिल्ली: भारत अपनी जरूरत(LPG Crisis) की 54% से अधिक LNG ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Strait of Hormuz) के रास्ते मंगाता है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण यह समुद्री मार्ग असुरक्षित हो गया है, जिससे तेल और गैस के टैंकरों की आवाजाही थम गई है। इसके अतिरिक्त, कतर जैसे देशों में ड्रोन हमलों के डर से प्रोडक्शन रुकने के कारण सप्लाई चेन पूरी तरह टूट गई है, जिसका सीधा असर भारत के गैस भंडार पर पड़ रहा है।
राज्यों में कालाबाजारी और हाहाकार
देश के विभिन्न राज्यों जैसे बिहार, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में स्थिति नियंत्रण से बाहर होती दिख रही है। जहाँ ₹900 का घरेलू सिलेंडर ₹1800 तक में बिक रहा है, वहीं कॉमर्शियल सिलेंडर(LPG Crisis) ₹4000 के पार पहुँच गया है। उत्तराखंड और राजस्थान में होटल और मेस संचालकों ने गैस की कमी के कारण या तो मेन्यू छोटा कर दिया है या फिर पारंपरिक लकड़ी और कोयले की भट्ठियों का सहारा लेना शुरू कर दिया है।
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सरकार के सख्त कदम और भविष्य की राह
सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम’ लागू किया है और घरेलू सिलेंडर की बुकिंग के लिए 25 दिन का अंतराल अनिवार्य कर दिया है। गैस की चोरी और जमाखोरी(LPG Crisis) रोकने के लिए बायोमेट्रिक और OTP वेरिफिकेशन को सख्ती से लागू किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि वे अमेरिका और रूस जैसे वैकल्पिक देशों से गैस मंगाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि जल्द से जल्द आपूर्ति बहाल हो सके।
घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग के नियमों में क्या मुख्य बदलाव हुए हैं?
सरकार ने जमाखोरी रोकने के लिए नया नियम बनाया है कि एक सिलेंडर की डिलीवरी होने के बाद ग्राहक दूसरा सिलेंडर कम से कम 25 दिन बाद ही बुक कर सकेंगे। इसके अलावा, अब डिलीवरी के समय OTP या बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है।
कॉमर्शियल गैस की कमी का असर खाद्य उद्योग पर क्या पड़ रहा है?
कॉमर्शियल गैस की किल्लत और ब्लैक मार्केटिंग के कारण उत्तराखंड जैसे राज्यों में होटलों ने अपने मेन्यू से 70% आइटम हटा दिए हैं। कई शहरों में रेस्टोरेंट संचालक अब इंडक्शन या कोयले की भट्टियों पर खाना बनाने को मजबूर हैं, जिससे उनकी लागत और मेहनत बढ़ गई है।
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