Rural Economy: ‘जी राम जी’ मिशन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई उड़ान

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राज्यों को मिलेगा ₹17,000 करोड़ का लाभ

नई दिल्ली: केंद्र सरकार के नए कानून ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन’ (VB-G RAM G) ने ग्रामीण(Rural Economy) परिवारों के लिए रोजगार की गारंटी को 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की रिपोर्ट के अनुसार, फंडिंग के नए 60:40 अनुपात (केंद्र:राज्य) के बावजूद, राज्यों को सामूहिक रूप से ₹17,000 करोड़ का शुद्ध वित्तीय लाभ होगा। पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों(Hill States) के लिए यह सहायता और भी अधिक है, जहाँ केंद्र सरकार 90% खर्च वहन करेगी, जिससे इन राज्यों की वित्तीय स्थिति पर बोझ नहीं पड़ेगा

यूपी, बिहार और महाराष्ट्र जैसे राज्यों को बड़ा फायदा

SBI की रिपोर्ट में पिछले सात वर्षों के मनरेगा आंकड़ों की तुलना नए सिस्टम से की गई है। इसमें यह उभर कर आया है कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार जैसे बड़े राज्यों(Rural Economy) को इस नई व्यवस्था से सबसे अधिक आर्थिक लाभ होने की उम्मीद है। रिपोर्ट उन आशंकाओं को भी खारिज करती है कि नए फंडिंग पैटर्न से राज्यों पर कर्ज का बोझ बढ़ेगा। इसके उलट, फंड का वितरण ‘इक्विटी और एफिशिएंसी’ के आधार पर होने से पिछड़े राज्यों को अपने बुनियादी ढांचे के विकास के लिए अधिक संसाधन मिल सकेंगे।

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राज्यों को मिली काम के प्रबंधन की आजादी

नए कानून की धारा 6 राज्य सरकारों को एक विशेष शक्ति देती है। राज्य अब खेती के व्यस्त समय (बुवाई और कटाई) के दौरान साल में अधिकतम 60 दिनों तक इस योजना(Rural Economy) के तहत मिलने वाले काम को नियंत्रित कर सकेंगे। इससे खेती के लिए मजदूरों की कमी नहीं होगी और कृषि कार्य प्रभावित नहीं होंगे। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि राज्य सरकारें अपने 40% योगदान का प्रभावी ढंग से उपयोग कर न केवल गरीबी कम कर सकती हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी संपत्ति (Assets) का निर्माण भी कर सकती हैं।

‘जी राम जी’ योजना मनरेगा से किस प्रकार अलग और बेहतर है?

मुख्य अंतर रोजगार के दिनों और फंडिंग में है। मनरेगा में साल में 100 दिन के काम की गारंटी थी, जिसे अब बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। इसके अलावा, नए कानून में फंडिंग का ढांचा (60:40) अधिक स्पष्ट है और राज्यों को कृषि सत्र(Rural Economy) के दौरान काम को मैनेज करने की अधिक स्वायत्तता दी गई है।

क्या 60:40 के फंडिंग रेश्यो से राज्यों की वित्तीय स्थिति खराब होगी?

नहीं, SBI की रिपोर्ट के अनुसार यह डर निराधार है। डेटा विश्लेषण दिखाता है कि नए सिस्टम से राज्यों को लगभग ₹17,000 करोड़ का शुद्ध लाभ होगा। यह व्यवस्था फंड के बेहतर वितरण और कार्यक्षमता पर आधारित है, जिससे राज्यों को अतिरिक्त कर्ज लेने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

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Dhanarekha

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