नई दिल्ली। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान (Israel and Iran) पर किए गए हालिया हमलों के बाद सुरक्षा विशेषज्ञों ने एक गंभीर चेतावनी जारी की है। एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, इन हमलों से उत्पन्न होने वाली अस्थिरता का लाभ आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट-खुरासान प्रांत (आईएसकेपी) लंबे समय तक उठा सकता है।
क्षेत्रीय अस्थिरता से बढ़ सकता है खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान में राजनीतिक या सामाजिक अस्थिरता बढ़ती है, तो इसका प्रभाव केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरे क्षेत्र और वैश्विक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है।
इराक युद्ध से की गई तुलना
अंतरराष्ट्रीय सहयोग विशेषज्ञ पीटर क्नूपे ने इस स्थिति का विश्लेषण करते हुए इसकी तुलना 2003 इराक युद्ध से की है। उन्होंने कहा कि उस समय इराक में सत्ता संतुलन बिगड़ने के कारण जो शून्यता पैदा हुई थी, उसी ने दाएश (ISIS) जैसे खूंखार संगठनों के उदय का मार्ग प्रशस्त किया था।
चरमपंथ के लिए अनुकूल माहौल
रिपोर्ट के अनुसार, भले ही तथाकथित खिलाफत का अंत हो चुका हो, लेकिन इसके अवशेष आज भी पश्चिम एशिया, अफ्रीका और एशिया के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय हैं। इसमें उन कारकों को रेखांकित किया गया है जो चरमपंथी संगठनों के पनपने में मदद करते हैं, जैसे हथियारों का अवैध प्रसार, कमजोर शासन व्यवस्था, जनता में बढ़ता असंतोष, मानवाधिकारों का उल्लंघन और दमनकारी नीतियां।
भर्ती और हिंसा में तेजी की आशंका
ऐसे अवसरवादी माहौल में आतंकी संगठन लोगों के गुस्से और असुरक्षा की भावना का फायदा उठाकर बड़े पैमाने पर भर्ती और हिंसा को बढ़ावा देते हैं। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि ईरान में बढ़ते तनाव और ‘हम बनाम वे’ जैसी पहचान आधारित राजनीति आईएसकेपी के लिए सुनहरा अवसर साबित हो सकती है।
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पड़ोसी देशों में भी बढ़ सकता है जोखिम
इससे न केवल ईरान के भीतर बल्कि पड़ोसी देशों में भी शिया समुदायों, धार्मिक संस्थानों और व्यक्तियों पर लक्षित हमलों का खतरा काफी बढ़ सकता है। कुल मिलाकर, मौजूदा क्षेत्रीय तनाव आतंकी संगठनों को फिर से पैर पसारने का अनुकूल वातावरण प्रदान कर रहा है।
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