स्टार्टअप्स की अभूतपूर्व संख्या और यूनिकॉर्न का उदय
नई दिल्ली: पिछले एक दशक में भारत में स्टार्टअप(StartUp) की संख्या में जबरदस्त उछाल आया है। 2014 में जहाँ देश में 500 से भी कम स्टार्टअप थे, वहीं आज यह संख्या 2 लाख (2.09 लाख) के पार पहुँच गई है। प्रधानमंत्री ने गर्व(Proud) के साथ बताया कि 2014 में देश में केवल 4 यूनिकॉर्न (1 अरब डॉलर से अधिक मूल्य वाली कंपनियां) थे, लेकिन आज भारत सवा सौ (125+) से अधिक एक्टिव यूनिकॉर्न के साथ दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है। 2025 में ही लगभग 50,000 नए स्टार्टअप्स खुले हैं, जो औसतन 136 स्टार्टअप प्रतिदिन की रफ्तार को दर्शाता है।
मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस और रिस्क-टेकिंग एबिलिटी
PM मोदी ने स्टार्टअप्स(StartUp) के लिए भविष्य का नया मंत्र दिया है: ‘सर्विसेज से मैन्युफैक्चरिंग की ओर।’ उन्होंने जोर दिया कि अब समय आ गया है जब भारत को न केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाने चाहिए, बल्कि वैश्विक स्तर की उत्तम गुणवत्ता वाले भौतिक उत्पाद (Physical Products) भी भारत में ही तैयार करने चाहिए। उन्होंने अपनी ‘रिस्क लेने की आदत’ का जिक्र करते हुए युवाओं को प्रेरित किया कि वे चुनाव या हार-जीत के डर से ऊपर उठकर देश की जरूरतों के लिए नवाचार करें। सरकार का ‘रेनबो विजन’ विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा कर रहा है।
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समावेशी विकास और नौकरियों का सृजन
स्टार्टअप इंडिया अब केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है। आंकड़ों के अनुसार, 52.6% स्टार्टअप(StartUp) अब टियर-2 और टियर-3 शहरों से निकल रहे हैं, जो छोटे शहरों की प्रतिभा को उजागर करता है। महिला उद्यमिता में भी बड़ी वृद्धि हुई है, जहाँ 50% स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक है। पिछले 10 वर्षों में इन स्टार्टअप्स ने देशभर में 21 लाख प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा की हैं। हालांकि, इस दौरान 6,385 स्टार्टअप बंद भी हुए हैं, लेकिन यह दर (3%) वैश्विक मानकों के मुकाबले दुनिया में सबसे कम है, जो भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम की मजबूती को दर्शाता है।
PM मोदी के अनुसार स्टार्टअप इंडिया अभियान का ‘रेनबो विजन’ क्या है?
PM मोदी के अनुसार, ‘स्टार्टअप इंडिया’ केवल एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि एक ‘रेनबो विजन’ (इंद्रधनुषी दृष्टिकोण) है। इसका उद्देश्य केवल डिजिटल(StartUp) सेवाओं तक सीमित रहना नहीं है, बल्कि देश के विभिन्न क्षेत्रों (जैसे कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और विशेष रूप से मैन्युफैक्चरिंग) को नई संभावनाओं और तकनीकी नवाचार से जोड़ना है ताकि भारत हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर और अग्रणी बन सके।
भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में टियर-2 और टियर-3 शहरों की क्या भूमिका है?
भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम अब विकेंद्रीकृत हो रहा है। DPIIT की रिपोर्ट के अनुसार, 52.6% स्टार्टअप मेट्रो शहरों के बाहर (छोटे शहरों और कस्बों में) स्थित हैं। इसका मतलब है कि नवाचार और उद्यमशीलता अब दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे शहरों के युवा भी अब स्थानीय समस्याओं का समाधान ढूंढ रहे हैं और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं।
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