GAZA में भूख से मर रहे बच्चे और महिलाएं, आईपीसी आंकड़ों में उलझा

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जनेवा । हाड़ मांस का शरीर गठरी बन चुका है। पीठ और पेट एक हो गए हैं। धमनियों का रक्तप्रवाह रुक रहा है। दाने-दाने को मोहताज बच्चे काल की गाल में समा रहे हैं। हमास के हमले के बाद गाजा में इजरालल ने जो बर्बरता की उसका खामियाजा फलस्तीनी महिलाएं और बच्चे भुगत रहे हैं। अब तक 60000 लोग इजराइली हमलों में मारे जा चुके हैं। हर तीन घंटे पर एक बच्चे की मौत हो रही है। किसी का दिल पसीज नहीं रहा। 90 फीसदी घर जमीदोंज हो चुके हैं। टेंट में बूढ़े और बच्चे दिन गिन रहे हैं। खाने के लिए कुछ नहीं बचा है, लेकिन फिर भी अकाल या भुखमरी घोषित नहीं हो सकती। हर दिन 2000 बच्चे जो नहीं मर रहे. आप सही पढ़ रहे हैं।

इंटीग्रेटेड फूड सेक्योरिटी फेज क्लासिफिकेशन (IPC) की तीन शर्तों में एक शर्त ये है। हर 10,000 की आबादी में पांच बच्चों की मौत रोज हो तभी अकाल घोषित किया जाएगा। फलस्तीनियों की आबादी करीब 20 लाख है। इस लिहाज से जरूरी संख्या एक हजार बैठती है। मीडिया रिपोर्ट (Media Report) के मुताबिक इजराइल ने नाकेबंदी में ढील दी है लेकिन दो करोड़ की आबादी तक राशन पहुंचाना आसान नहीं है। खास कर तब जब राशन के ट्रक की तरफ बढ़ती हाथ गोलियों से छलनी हो जाए।

गाजा के 90 फीसदी हिस्से पर इजराइली सेना की नजर

गाजा के 90 फीसदी हिस्से पर इजराइली सेना की नजर है और वह किसी भी शक का सफाया करना चाहती है। चाहे बच्चे मरे या बूढ़े इससे उसे फर्क नहीं पड़ता। अब सवाल उठता है कि आईपीसी ने भुखमरी की घोषणा क्यों नहीं की। संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम का कहना है कि गाजा का भुखमरी संकट हताशे के स्तर तक पहुंच गया है। इस महीने अब तक 82 लोगों की कुपोषण से मौत हो चुकी है। इनमें 24 बच्चे हैं। आईपीसी ने इससे पहले 2004 में सोमालिया को भुखमरी से पीड़ित घोषित किया था।

2020 में सूडान के एक खास हिस्से को अकालपीड़ित घोषित किया था

इसके बाद 2017 और 2020 में सूडान के एक खास हिस्से को अकालपीड़ित घोषित किया था। यह कैसे मानदंड है, जरा सोचिए गाजा की आबादी के हिसाब से हम एक हजार बच्चों की रोजाना मौत चाहते हैं तब ये तय करेंगे कि भुखमरी की स्थिति है। दूसरा सवाल यह उठता है कि ये डेटा कौन जुटाए। हम ये तो जानते हैं कि हर दिन 80 लोग मारे जा रहे हैं, लेकिन बम से मर रहे या भूख से ये कौन तय करेगा। आईपीसी आंकड़ों के झोल में फंसी है। उसे ये समझ नहीं आ रहा है कि भूख से तड़पता आदमी ही राशन सेंटर पर मार दिया जाता है।

गाजा की 90 फीसदी आबादी विस्थापित है

संयुक्त राष्ट्र संघ(UNO) के लिए ये एक चुनौती बन गया है। उसकी कोई सुन भी नहीं रहा है। डोनाल्ड ट्रंप तो इसे खिलौना समझ रहे हैं। गाजा पट्टी का मुख्य अस्पताल इजरायली बमबारी में मैदान बन चुका है, जो अस्पताल बचे हैं वहां इलाज के लिए दवा नहीं है। गाजा की 90 फीसदी आबादी विस्थापित है। विदेशों से राहत भरे टैंकर इजराइल ने रोक रखे हैं। ऐसे में हम एक मानवीय त्रासदी की तरफ बढ़ रहे हैं

गाजा किस देश में है?

गाजा शहर, जिसे आधिकारिक तौर पर गाजा कहा जाता है, गाजा पट्टी, फिलिस्तीन में एक शहर है, और गाजा प्रांत की राजधानी है।

क्या गाजा एक इस्लामिक देश है?

अमेरिकी सरकार का अनुमान है कि पश्चिमी तट पर कुल फ़िलिस्तीनी आबादी 30 लाख और गाज़ा पट्टी पर 20 लाख (वर्ष 2022 के मध्य तक) होगी। अमेरिकी सरकार और अन्य स्रोतों के अनुसार, इन क्षेत्रों में रहने वाले फ़िलिस्तीनी निवासी मुख्यतः सुन्नी मुसलमान हैं, जिनमें शिया और अहमदिया मुस्लिम समुदाय भी शामिल हैं ।

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Anuj Kumar

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