Ekō Ending Explained : Ekō एक रहस्यमय थ्रिलर है, जो धीरे-धीरे दर्शकों के बीच लोकप्रिय हो रही है। Dinjith Ayyathan के निर्देशन में बनी यह फिल्म नॉन-लिनियर स्टाइल में आगे बढ़ती है, जिससे इसका क्लाइमेक्स कई लोगों को भ्रमित कर देता है।
Ekō के मुख्य किरदार
इस फिल्म को समझने के लिए चार किरदार अहम हैं।
कुरियाचन (Saurabh Sachdeva)
एक अमीर, प्रभावशाली व्यक्ति और डॉग ब्रीडर। (Ekō Ending Explained) एक चाकूबाजी की घटना के बाद वह गायब हो जाता है।
पीयोस (Sandeep Pradeep)
मालाथी चेट्टाथी का देखभाल करने वाला दिखता है, लेकिन असल में वह कुरियाचन की सच्चाई जानने आया होता है।
मोहन पोथन (Vineeth)
कुरियाचन का पुराना दोस्त, जिसे बाद में वह धोखा देकर जेल भिजवा देता है।
सोयी / मालाथी चेट्टाथी
फिल्म की आत्मा – जिसके साथ सबसे बड़ा अन्याय हुआ।
असली कहानी
द्वितीय विश्व युद्ध के समय मलेशिया में कुरियाचन और मोहन एक दुर्लभ नस्ल के कुत्तों की तलाश में जाते हैं। वहां वे सोयी और उसके पति से मिलते हैं। बाद में कुरियाचन धोखे से उसके पति को जेल भिजवा देता है और सोयी को यह झूठ बताता है कि उसका पति मर चुका है।
वह सोयी को भारत ले आता है और कुत्तों को अपने कब्जे में कर लेता है।
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सच्चाई और बदला
सालों बाद मोहन पोथन सोयी को सच्चाई बता देता है। जब कुरियाचन खून से लथपथ वहां आता है, तब सोयी उसे माफ नहीं करती। वह जंगल में छिप जाता है, लेकिन जिन कुत्तों पर उसे भरोसा था, वही उसे कैद कर लेते हैं।
क्योंकि कुत्तों पर असली नियंत्रण सोयी का होता है।
वह उन्हीं कुत्तों की मदद से मोहन पोथन को भी मार देती है।
अंत में क्या होता है?
पीयोस और सोयी एक-दूसरे की सच्चाई जान लेते हैं।
लेकिन पीयोस कुछ नहीं कर सकता।
कुत्ते सोयी की सुनते हैं, और कुरियाचन कहां है यह सिर्फ उसी को पता है।
यही Ekō का असली क्लाइमेक्स है – शक्ति, नियंत्रण और प्रतिशोध।
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