living मस्तिष्क कोशिकाओं से बना पहला कंप्यूटर

Read Time:  1 min
FONT SIZE
GET APP

living मस्तिष्क कोशिकाओं से बना पहला कंप्यूटर: तकनीक की दुनिया में क्रांति

तकनीक की दुनिया में हर दिन कुछ नया देखने को मिलता है, लेकिन इस बार जो हुआ वह विज्ञान और तकनीक दोनों के इतिहास में क्रांतिकारी है। स्विट्ज़रलैंड की स्टार्टअप कंपनी Final Spark ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है जिसे सुनकर हर कोई चौंक जाएगा। उन्होंने मानव मस्तिष्क की living कोशिकाओं से बना दुनिया का पहला कंप्यूटर पेश किया है, जो बायोकंप्यूटिंग की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

क्या है यह “लिविंग कंप्यूटर”?

यह कंप्यूटर परंपरागत सिलिकॉन चिप्स पर आधारित नहीं है, बल्कि इसमें प्रयोग किए गए हैं स्टेम सेल्स से बनाए गए ऑर्गनॉइड्स। ये ऑर्गनॉइड्स दरअसल छोटे-छोटे मस्तिष्क जैसे सेल क्लस्टर हैं, जो इंसानी दिमाग की तरह सूचना को संसाधित कर सकते हैं।

living मस्तिष्क कोशिकाओं से बना पहला कंप्यूटर
living मस्तिष्क कोशिकाओं से बना पहला कंप्यूटर

कैसे करता है यह काम?

FinalSpark ने 16 मानव मस्तिष्क ऑर्गनॉइड्स को जोड़कर एक ऐसा नेटवर्क तैयार किया जो कंप्यूटेशनल कार्य कर सकता है। ये कोशिकाएं एक-दूसरे के साथ संकेतों का आदान-प्रदान करती हैं, ठीक वैसे ही जैसे हमारे दिमाग में न्यूरॉन्स करते हैं।

इसके अलावा, यह कंप्यूटर पारंपरिक कंप्यूटरों की तुलना में 100 गुना कम ऊर्जा खर्च करता है। इस लिहाज से यह तकनीक न सिर्फ स्मार्ट है, बल्कि सस्टेनेबल भी है।

क्यों है यह क्रांतिकारी?

इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें सुपर-फास्ट प्रोसेसिंग और लो एनर्जी कंजम्प्शन एक साथ मिलते हैं। जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से विकसित हो रही है, वहीं यह “लिविंग कंप्यूटर” AI को एक नया आयाम दे सकता है।

नैतिक पहलुओं पर भी चर्चा जरूरी

हालांकि, जब बात living मस्तिष्क कोशिकाओं की होती है, तो सवाल उठता है कि क्या इन कोशिकाओं में संवेदनशीलता या चेतना भी विकसित हो सकती है? यदि हां, तो क्या हमें इन्हें मशीनों की तरह उपयोग करना चाहिए?

इस विषय पर वैज्ञानिक समुदाय में बहस छिड़ चुकी है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक के विकास के साथ-साथ एथिकल गाइडलाइंस भी बननी चाहिए ताकि इसका उपयोग सीमित और नियंत्रित तरीके से हो सके।

living मस्तिष्क कोशिकाओं से बना पहला कंप्यूटर
living मस्तिष्क कोशिकाओं से बना पहला कंप्यूटर

आगे क्या?

अब जब पहला प्रोटोटाइप दुनिया के सामने आ चुका है, तो भविष्य में इसके कई उपयोग सामने आ सकते हैं। मेडिकल रिसर्च, न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स की स्टडी, और यहां तक कि सुपरकंप्यूटिंग के क्षेत्र में भी यह क्रांति ला सकता है।

इस खोज ने न सिर्फ तकनीकी दुनिया में हलचल मचा दी है, बल्कि यह भी दिखा दिया है कि भविष्य में कंप्यूटिंग केवल मशीनों तक सीमित नहीं रहेगी। living कोशिकाओं से बना यह कंप्यूटर न केवल तेज है बल्कि पर्यावरण के लिए भी बेहतर विकल्प बन सकता है।

इस खोज को यदि सही दिशा और सीमाएं दी गईं, तो यह मानवता के लिए अगली बड़ी छलांग हो सकती है।

digital@vaartha.com

लेखक परिचय

[email protected]

सूचना : इस वेबसाइट पर प्रकाशित खबरें केवल पाठकों की जानकारी के उद्देश्य से दी जाती हैं। हम अपनी ओर से यथासंभव सही और सटीक जानकारी प्रदान करने का प्रयास करते हैं।