कनाडा में अलगाववादी आंदोलन
Canada Alberta : शांत और स्थिर देश के रूप में पहचाने जाने वाले कनाडा में अब अलगाववादी आंदोलन चर्चा का विषय बन गया है। अल्बर्टा प्रांत को अलग देश बनाने की मांग तेजी से बढ़ रही है। कनाडा के सबसे समृद्ध प्रांतों में शामिल अल्बर्टा में अलगाववादी आंदोलन ने जोर पकड़ लिया है। ‘स्टे फ्री अल्बर्टा’ नामक संगठन के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन को बड़ी संख्या में लोगों का समर्थन मिल रहा है। कनाडा से अलग होकर स्वतंत्र देश बनने की मांग करते हुए करीब तीन लाख लोगों ने हस्ताक्षर कर चुनाव आयोग को ज्ञापन सौंपा है। आंदोलनकारी स्वतंत्रता पर जनमत संग्रह कराने की मांग कर रहे हैं। कई दशकों से जारी आर्थिक और राजनीतिक असंतोष अब कनाडा सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
अल्बर्टा में असंतोष की वजह क्या है?
विश्लेषकों के अनुसार, अल्बर्टा के लोगों में बढ़ते असंतोष की सबसे बड़ी वजह आर्थिक असमानता है। तेल और प्राकृतिक गैस उत्पादन में अहम भूमिका निभाने वाला यह प्रांत कनाडा के सबसे अमीर इलाकों में गिना जाता है। इसके बावजूद यहां के लोगों का आरोप है कि केंद्र सरकार को भारी कर देने के बाद भी उन्हें उसका उचित लाभ नहीं मिल रहा।
वर्ष 2023-24 में कनाडा सरकार द्वारा समानता कार्यक्रम के तहत वितरित किए गए 23 अरब डॉलर में अल्बर्टा को कोई हिस्सा नहीं मिला। अलगाववादी समूहों का कहना है कि पिछले कई दशकों में रोजगार बीमा के जरिए इस प्रांत से अरबों डॉलर संघीय खजाने में गए, लेकिन उसका उपयोग अन्य गरीब प्रांतों के विकास में किया गया।
आर्थिक कारणों के साथ राजनीतिक मतभेद भी इस आंदोलन को मजबूत बना रहे हैं। अल्बर्टा को परंपरावादी विचारधारा वाला प्रांत माना जाता है, जबकि कनाडा में पिछले कई वर्षों से लिबरल पार्टी सत्ता में है। स्थानीय नेताओं का आरोप है कि केंद्र सरकार की पर्यावरण नीतियां और कार्बन टैक्स अल्बर्टा के तेल उद्योग को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
अन्य पढें: सोने-चांदी की कीमतों में भारी उछाल: चांदी ₹2.56 लाख के पार
अलग देश बनना आसान नहीं
विशेषज्ञों का मानना है कि अल्बर्टा का अलग देश बनना आसान प्रक्रिया नहीं है। इसके सामने कई कानूनी बाधाएं हैं। तीन (Canada Alberta) लाख हस्ताक्षरों वाले ज्ञापन की जांच प्रक्रिया को अदालत ने फिलहाल रोक दिया है। स्थानीय आदिवासी समुदायों ने अदालत में याचिका दायर कर कहा है कि यह कदम उनके संवैधानिक अधिकारों को प्रभावित करेगा।
यदि अदालत जनमत संग्रह की अनुमति भी दे देती है, तब भी कनाडा के क्लैरिटी एक्ट के अनुसार केवल साधारण बहुमत काफी नहीं होगा। इसके लिए स्पष्ट सवाल और मजबूत बहुमत जरूरी होगा। अंतिम फैसला कनाडा की संघीय संसद को लेना होगा। अगर सभी कानूनी और राजनीतिक बाधाएं पार कर अल्बर्टा अलग देश बनता है, तो उसके बाद लंबी प्रक्रिया शुरू होगी। नए संविधान का निर्माण, अलग मुद्रा, केंद्रीय बैंक और सेना की स्थापना करनी होगी। साथ ही कनाडा, अमेरिका और अन्य देशों के साथ नए व्यापार समझौते करने होंगे। संयुक्त राष्ट्र जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की सदस्यता भी लेनी होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, अल्बर्टा को पूरी तरह स्थिर स्वतंत्र देश बनने में कम से कम दस साल से अधिक समय लग सकता है।
Read Telugu News: https://vaartha.com/
यह भी पढ़ें :