Pagla मस्जिद में फिर मिला नोटों का ढेर, मची हलचल

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Pagla मस्जिद में फिर निकला नोटों का भंडार, 28 बोरों में रखा गया कैश, गिनने के लिए तैनात 400 लोग

बांग्लादेश की प्रसिद्ध Pagla मस्जिद एक बार फिर सुर्खियों में है। वजह वही पुरानी—दान के तौर पर मिला भारी मात्रा में नकद कैश। इस बार मस्जिद में जमा हुए नोटों की गिनती के लिए 400 से अधिक लोगों की टीम लगाई गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुल 28 बोरियों में भरे गए नकद नोटों को गिनने का काम दो दिनों तक चला।

क्या है Pagla मस्जिद?

Pagla मस्जिद बांग्लादेश के किशोरगंज जिले में स्थित एक अत्यंत प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दान देते हैं, और खास बात यह है कि यह दान अक्सर नकद के रूप में होता है। यह मस्जिद हर बार बड़ी मात्रा में दान प्राप्त करने के लिए जानी जाती है।

इस बार कितना कैश मिला?

Pagla मस्जिद में इस बार मिले कैश को 28 बोरी में भरकर रखा गया। हर बोरी में विभिन्न मूल्य के नोट थे—कुछ 10, 50 और 100 के, जबकि बड़ी संख्या में 500 और 1000 के नोट भी शामिल थे। इन नोटों की गिनती करने के लिए बैंक, पुलिस और मस्जिद समिति की संयुक्त टीम बनाई गई, जिसमें 400 लोग शामिल थे।

गिनती की प्रक्रिया

  • नोटों को मस्जिद परिसर में बनाए गए अस्थायी बैंक काउंटर पर लाया गया।
  • सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए गए थे।
  • कैश काउंटिंग मशीनों के साथ-साथ मैन्युअल गिनती भी की गई।
  • इस प्रक्रिया में दो दिन का समय लगा।

यह कितना आम है?

Pagla मस्जिद में इस प्रकार का नकद दान कोई नई बात नहीं है। हर 3 महीने पर मस्जिद के दान बॉक्स खोले जाते हैं और हर बार लाखों टका (बांग्लादेशी मुद्रा) जमा होता है। पिछली बार लगभग 5 करोड़ टका मिले थे, और इस बार राशि इससे भी अधिक होने की संभावना है।

यह आस्था का प्रतीक या आर्थिक मॉडल?

Pagla मस्जिद न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि अब एक प्रकार का “जनता द्वारा संचालित ट्रस्ट मॉडल” बन चुका है। यहां जमा हुआ धन मस्जिद के रख-रखाव, स्कूल, अस्पताल और समाजसेवा में खर्च किया जाता है।

Pagla मस्जिद में हर बार मिलने वाला नकद दान आस्था और जनविश्वास का जीता-जागता उदाहरण है। इस बार 28 बोरियों में जमा हुआ कैश और 400 लोगों की गिनती टीम यह साबित करती है कि यह मस्जिद सिर्फ धार्मिक आस्था का नहीं, बल्कि सामुदायिक सेवा का भी बड़ा केंद्र बन चुकी है।

digital@vaartha.com

लेखक परिचय

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