Arshad Madani : गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करे सरकार

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अरशद मदनी
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अरशद मदनी की मांग से फिर गरमाई बहस

अरशद मदनी ने केंद्र सरकार से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि ऐसा करने से गाय को लेकर होने वाले विवाद हमेशा के लिए खत्म हो सकते हैं और समाज में सौहार्द बढ़ेगा।

आखिर क्यों उठी यह मांग?

‘धार्मिक और सामाजिक भावनाओं का सम्मान जरूरी’- अरशद मदनी (Arshad Madani) का मानना है कि भारत में गाय का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बहुत बड़ा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर दे, तो इससे विवाद और तनाव की स्थितियों में कमी आ सकती है।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद (AM) के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने गाय को (National Animal) ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस विवाद को हमेशा के लिए खत्म किया जाए, ताकि गाय के नाम पर होने वाली ‘मॉब लिंचिंग’ (भीड़ हत्या) की घटनाएं बंद हों। संगठन की ओर से बुधवार को जारी एक बयान के मुताबिक, मौलाना मदनी ने केंद्र की भाजपा नीत सरकार से सवाल किया कि जब देश की बहुसंख्यक आबादी गाय को केवल पवित्र ही नहीं मानती, बल्कि उसे मां का दर्जा देती है, तो फिर ऐसी क्या राजनीतिक मजबूरी है कि सरकार उसे ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने से बच रही है? 

गाय के नाम पर राजनीति भी शामिल 

उन्होंने दावा किया कि इन लोगों को गाय से वास्तविक श्रद्धा नहीं, बल्कि राजनीति से प्रेम है और राजनीति के जरिए लोगों को भड़काकर मुसलमानों के खिलाफ एकजुट किया जाता है और वोट हासिल किए जाते हैं। मदनी ने कहा कि चुनाव के समय कई भावनात्मक और राजनीतिक मुद्दे जानबूझकर उछाले जाते हैं, जिनमें गाय के नाम पर राजनीति भी शामिल है। 

मुस्लिम समुदाय को कोई आपत्ति नहीं

मुस्लिम नेता ने कहा कि गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने पर मुस्लिम समुदाय को आपत्ति नहीं है, बल्कि वे तो सरकार के इस कदम स्वागत करेंगे, क्योंकि इस दिशा में कानून बन जाने के बाद गाय के नाम पर होने वाली ‘मॉब लिंचिंग’ और हिंसा बंद हो जाएगी। 

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साधु-संतों की भी यही मांग

उन्होंने कहा, ‘यह मांग केवल हम नहीं कर रहे हैं, बल्कि अनेक साधु-संत भी लंबे समय से यह मांग उठा रहे हैं। इसके बावजूद यदि सरकार इस विषय को गंभीरता से नहीं ले रही है, तो इसका क्या अर्थ निकाला जाए?’ 

तस्करी के नाम पर निर्दोष लोग हिंसा का शिकार

मदनी ने दावा किया कि गाय के मुद्दे को राजनीतिक और भावनात्मक विषय बना दिया गया है और कुछ लोग योजनाबद्ध तरीके से गोकशी की अफवाह फैलाकर या पशु तस्करी के नाम पर निर्दोष लोगों को हिंसा का शिकार बना देते हैं। उन्होंने कहा कि उनका संगठन हर बार बकरीद के मौके पर मुसलमानों से प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी नहीं करने की अपील करता है, क्योंकि इस्लाम में इसकी अनुमति नहीं है कि दूसरे धर्मों की भावनाओं को आहत किया जाए। 

इसके लिए बनाए जाएं कानून

मदनी ने कहा कि इसलिए गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करके इस विवाद को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया जाए और इसके लिए जो भी कानून बनाया जाए, उसे देश के सभी राज्यों में बिना किसी भेदभाव के समान रूप से लागू किया जाए। 

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Surekha Bhosle

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Surekha Bhosle

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