हैदराबाद। रेल मंत्रालय ने तेलंगाना (Telangana) से तीन नई साप्ताहिक एक्सप्रेस ट्रेनों के संचालन को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही दक्षिण मध्य रेलवे द्वारा पहले से संचालित स्पेशल ट्रेनों को नियमित सेवा में परिवर्तित किया गया है। इन नई ट्रेनों के माध्यम से हैदराबाद और तेलंगाना के अन्य हिस्सों को जयपुर, अगरतला और श्रीगंगानगर से जोड़ा जाएगा, जिससे लंबी दूरी की रेल कनेक्टिविटी को बड़ी मजबूती मिलेगी। दक्षिण मध्य रेलवे (SCR) के अनुसार, ट्रेन संख्या 17079/17080 हैदराबाद–जयपुर–हैदराबाद साप्ताहिक एक्सप्रेस की सेवा 24 और 26 जुलाई से शुरू होगी। यह ट्रेन हैदराबाद, सिकंदराबाद, निजामाबाद, नांदेड़, भोपाल, उज्जैन, अजमेर और जयपुर जैसे प्रमुख स्टेशनों से होकर गुजरेगी। इसी तरह ट्रेन संख्या 17031/17032 चेर्लापल्ली–अगरतला–चर्लापल्ली साप्ताहिक एक्सप्रेस का संचालन 27 और 31 जुलाई से शुरू होगा।
नई साप्ताहिक एक्सप्रेस ट्रेन प्रत्येक शनिवार को काचीगुड़ा से श्री गंगानगर के लिए होगी रवाना
यह ट्रेन विजयवाड़ा, विजयनगरम, भुवनेश्वर, खड़गपुर, न्यू जलपाईगुड़ी, न्यू बोंगाईगांव, गुवाहाटी होते हुए अगरतला तक जाएगी। इसके अलावा रेल मंत्रालय ने काचीगुड़ा–श्री गंगानगर–काचीगुड़ा साप्ताहिक एक्सप्रेस ट्रेन (ट्रेन संख्या 17601/17602) के संचालन को मंजूरी दे दी है। यह सेवा पहले से चल रही 07053/07054 काचीगुड़ा–श्री गंगानगर साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन को नियमित ट्रेन के रूप में परिवर्तित कर शुरू की जा रही है। इस निर्णय से यात्रियों को स्थायी और सुगम रेल सेवा उपलब्ध होगी। यह नई साप्ताहिक एक्सप्रेस ट्रेन प्रत्येक शनिवार को काचीगुड़ा से श्री गंगानगर के लिए रवाना होगी और इसकी नियमित सेवा 25 जुलाई से शुरू होगी।
वहीं, श्री गंगानगर से काचीगुड़ा के लिए ट्रेन प्रत्येक मंगलवार को चलेगी और इसकी सेवा 28 जुलाई से प्रारंभ होगी। यह ट्रेन काचीगुड़ा रेलवे स्टेशन से शुरू होकर दक्षिण और उत्तर भारत के बीच एक महत्वपूर्ण रेल संपर्क स्थापित करेगी। इससे यात्रियों को यात्रा में अधिक सुविधा मिलेगी और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को भी मजबूती मिलेगी।
ट्रेन ड्राइवर की 1 महीने की सैलरी कितनी होती है?
भारतीय रेलवे में ट्रेन चलाने वाले को आधिकारिक रूप से लोको पायलट कहा जाता है। असिस्टेंट लोको पायलट की शुरुआती इन-हैंड सैलरी लगभग ₹35,000 से ₹45,000 प्रति माह होती है, जबकि सीनियर लोको पायलट की सैलरी ₹80,000 या उससे अधिक हो सकती है। वेतन के साथ महंगाई भत्ता, हाउस रेंट अलाउंस, नाइट ड्यूटी अलाउंस, मेडिकल सुविधा और मुफ्त रेल यात्रा जैसी सरकारी सुविधाएं भी मिलती हैं।
ट्रेन का पिता कौन था?
स्टीम इंजन ट्रेन का आविष्कार 21 फरवरी 1804 को यूनाइटेड किंगडम के इंजीनियर रिचर्ड ट्रेविथिक ने किया था, हालांकि यह पूरी तरह सफल नहीं रहा। इसके बाद 27 सितंबर 1825 को अंग्रेज इंजीनियर जॉर्ज स्टीफेंसन ने भाप के इंजन वाली पहली सफल ट्रेन बनाई। इस सफलता के बाद जॉर्ज स्टीफेंसन को “रेलवे का पिता” (Father of Railway) कहा जाने लगा।
एक ट्रेन में तत्काल सीट कितनी होती है?
तत्काल सीटों की संख्या ट्रेन और कोच के प्रकार पर निर्भर करती है। AC प्रथम श्रेणी और अनुभूति श्रेणी को छोड़कर बाकी सभी श्रेणियों में तत्काल बुकिंग की अनुमति होती है। सामान्यतः स्लीपर कोच में लगभग 10 से 15 सीटें और AC 3 टियर में 10 सीटें तत्काल कोटे के लिए आरक्षित रहती हैं। यह संख्या हर ट्रेन में अलग-अलग हो सकती है।
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