हैदराबाद। देश में पहली बार, हैदराबाद सिटी पुलिस ने शुक्रवार को ‘सी-मित्र’ (साइबर- मित्र ) लॉन्च किया, एक वर्चुअल हेल्प डेस्क जिसे साइबर क्राइम के शिकार नागरिकों को पुलिस स्टेशन (Police Station) गए बिना ही प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने में मदद करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह पहल नागरिकों को डिजिटल अपराधों जैसे ओटीपी फ्रॉड, डिजिटल जमानत, निवेश और ट्रेडिंग घोटालों के बढ़ते खतरे से राहत प्रदान करने का उद्देश्य रखती है।
आम जनता के दरवाजे तक पुलिसिंग
हैदराबाद पुलिस कमिश्नर वी.सी. सज्जनार ने बताया कि यह “वर्चुअल पुलिस अधिकारी” प्रणाली तकनीक का उपयोग कर आम जनता के दरवाजे तक पुलिसिंग लाने का काम करती है। सी- मित्र सेवा केवल हैदराबाद पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र में रहने वाले निवासियों के लिए उपलब्ध है। प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में है। प्राथमिक रिपोर्टिंग: पीड़ित को पहले ‘1930’ हेल्पलाइन पर कॉल करना होगा या राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर शिकायत दर्ज करनी होगी। वर्चुअल सहायता: रिपोर्टिंग के बाद, सी-मित्र टीम के ‘वर्चुअल पुलिस अधिकारी’ पीड़ित से संपर्क करेंगे। शिकायत का प्रारूप तैयार करना: कई पीड़ित कानूनी शब्दावली या संबंधित धाराओं को लेकर असमंजस में रहते हैं।
विवरण के आधार पर सटीक शिकायत तैयार करेगी
सी-मित्र टीम एआई का उपयोग करके दिए गए विवरण के आधार पर सटीक शिकायत तैयार करेगी और इसे पीड़ित को भेजेगी। प्रस्तुति: पीड़ित को इस प्रारूप का प्रिंट आउट लेकर उस पर हस्ताक्षर करना होगा और इसे साइबर मित्र हेल्प डेस्क, बशीरबाग को पोस्ट या कूरियर करना होगा। ड्रॉप बॉक्स सुविधा: वैकल्पिक रूप से, साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन पर ड्रॉप बॉक्स उपलब्ध है, जिसमें पीड़ित हस्ताक्षरित शिकायत की कॉपी जमा कर सकते हैं। एफआईआर पंजीकरण: भौतिक प्रति प्राप्त होने के बाद पुलिस एफआईआर दर्ज करेगी और विवरण एसएमएस के माध्यम से पीड़ित को भेजेगी।
वर्तमान में भौतिक हस्ताक्षर अनिवार्य हैं
अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में भौतिक हस्ताक्षर अनिवार्य हैं, लेकिन भविष्य में डिजिटल हस्ताक्षर विकल्प पर भी काम किया जा रहा है। सीपी ने बताया कि सी -मित्र के तहत मामलों की जांच को सुव्यवस्थित करने के लिए पुलिस ने सीमा तय की है। इसमें 3 लाख से अधिक नुकसान वाले मामले की एफआईआ साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज और जांच की जाएगी। 3 लाख से कम नुकसान वाले मामलों को जीरों एफआईआर के रूप में दर्ज किया जाएगा और आगे की जांच के लिए संबंधित स्थानीय कानून एवं व्यवस्था पुलिस स्टेशन को स्थानांतरित किया जाएगा।
पुलिस के अनुसार, एफआईआर पंजीकृत कराने में औसतन तीन घंटे लगते हैं। सी-मित्र नागरिकों का समय बचाने और स्टाफ को जांच पर ध्यान केंद्रित करने का लक्ष्य रखता है। वर्तमान में ‘1930’ हेल्पलाइन और राष्ट्रीय पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों में से केवल 18% एफआईआर में परिवर्तित होती हैं। विभाग ने सी-मित्र के माध्यम से इस दर को 100% तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।
24 सदस्यीय टीम एआई उपकरणों के साथ सेवा प्रदान करेगी
वर्चुअल हेल्पडेस्क सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक चलेगा, 24 सदस्यीय टीम एआई उपकरणों के साथ सेवा प्रदान करेगी। फिशिंग और नकली कॉल से नागरिकों की सुरक्षा के लिए पुलिस ने कई निर्देश जारी किए हैं। सी-मित्र की आधिकारिक कॉल केवल लैंडलाइन नंबर 040-4189-3111 से आएगी। व्हाटऐप संदेश केवल 87126 श्रृंखला के नंबरों से भेजे जाएंगे। स्टाफ कभी भी ओटीपी या पैसे की मांग नहीं करेगा। पुलिस ने स्पष्ट किया कि सी-मित्र केवल एफआईआर पंजीकरण के लिए सुविधा प्रदान करता है।
यह जांच नहीं करता, कानूनी सलाह नहीं देता और खोई हुई राशि की वसूली की गारंटी नहीं देता। मामले की स्थिति या वसूली के लिए, पीड़ित को उस पुलिस स्टेशन से संपर्क करना होगा जहां एफआईआर दर्ज या स्थानांतरित की गई है। इस अवसर पर पुलिस कमिश्नर ने एम. श्रीनिवासुलु, (अतिरिक्त सीपी, क्राइम्स एंड एसआईटी ), ए. अरविंद बाबू, डीसीपी(साइबर क्राइम), शिवमारुती, एसीपी (साइबर क्राइम) और उनकी टीम की सराहना की। उन्होंने अन्य डीसीपी, अधिकारियों और स्टाफ के सहयोग के लिए भी प्रशंसा व्यक्त की।
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