BCReservation : प्रशांत रेड्डी ने रेवंत रेड्डी पर पिछड़ा वर्ग आरक्षण पर राजनीतिक खेल खेलने का लगाया आरोप

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रेवंत रेड्डी
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रोजाना कर रहे खोखली बातें, किए गए नाटक

हैदराबाद : पूर्व मंत्री और बीआरएस विधायक (BRS MLA) वेमुला प्रशांत रेड्डी ने मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी और कांग्रेस सरकार पर पिछड़ी जातियों को आरक्षण (BCReservation) के नाम पर झूठे वादों और राजनीतिक हथकंडों के ज़रिए धोखा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कामारेड्डी बीसी घोषणापत्र का इस्तेमाल विधानसभा चुनावों के दौरान पिछड़ी जातियों के मतदाताओं को लुभाने के लिए किया गया था, और उसके बाद रोज़ाना खोखली बातें और नाटक किए गए

राहुल, प्रियंका, सोनिया गांधी या मल्लिकार्जुन खड़गे इस धरने में क्यों नहीं आए?

उन्होंने सवाल किया, ‘कांग्रेस सरकार ने विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया, फिर पिछड़ा वर्ग आरक्षण विधेयक पेश किया, उसके बाद अध्यादेश लाया और अंत में दिल्ली में धरना दिया। अगर कांग्रेस इस मुद्दे के लिए प्रतिबद्ध थी, तो स्थानीय स्तर पर मौजूद राहुल, प्रियंका, सोनिया गांधी या मल्लिकार्जुन खड़गे इस धरने में क्यों नहीं आए?’ प्रशांत रेड्डी ने कहा कि कांग्रेस पिछड़े वर्गों को 42 प्रतिशत आरक्षण का वादा करके गुमराह कर रही है, जबकि राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आने वाले वादों को पूरा करने में विफल रही है। उन्होंने पिछड़े वर्गों से आगामी चुनावों में कांग्रेस को सबक सिखाने का आग्रह करते हुए कहा, ‘रेवंत रेड्डी का कहना है कि पिछड़े वर्गों को आरक्षण तब मिलेगा जब राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनेंगे। क्या आप तब तक स्थानीय निकाय चुनाव रोकेंगे?’

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हैदराबाद में हिन्दू आबादी कितनी है?

शहर की कुल जनसंख्या में हिंदुओं का प्रतिशत लगभग 30 से 35 के बीच माना जाता है। बाकी आबादी में मुस्लिम, ईसाई और अन्य समुदाय शामिल हैं। यह आंकड़ा अलग-अलग सर्वे और जनगणना रिपोर्ट में थोड़ा-बहुत भिन्न हो सकता है।

हैदराबाद का पुराना नाम क्या था?

इस शहर को पुराने समय में भाग्यनगर के नाम से जाना जाता था। यह नाम भागमती नामक रानी के सम्मान में रखा गया था, जिनसे सुल्तान मोहम्मद कुली कुतुब शाह ने विवाह किया था। बाद में इसका नाम बदलकर हैदराबाद कर दिया गया।

हैदराबाद में कौन सी भाषा बोली जाती है?

शहर में प्रमुख रूप से तेलुगु और उर्दू भाषाएं बोली जाती हैं। इसके अलावा हिंदी और अंग्रेज़ी भी व्यापक रूप से समझी जाती हैं। स्थानीय बोलचाल में देसी उर्दू का एक विशेष अंदाज़ पाया जाता है, जो यहां की संस्कृति का हिस्सा है।

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