सिंधु नहर विवाद पाकिस्तान: पाकिस्तान में सिंधु नदी से जुड़ी विवादास्पद नहर कार्यप्रणाली ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने साफ़ चेतावनी दी है कि अगर संघीय गवर्नमेंट इस कार्यप्रणाली पर उनकी विरोध को दूर नहीं करती तो उनकी पार्टी सत्तारूढ़ गठबंधन से भिन्न हो जाएगी।
हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए बिलावल ने कहा कि “यदि सिंधु नदी का पानी मजबूरी मोड़ा गया तो PPP आपके (PML-N) संगत नहीं रह सकती।” उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को सुचेत कि अगर निर्णय करना पड़ा तो वह जनता का साथ चुनेंगे।
चोलिस्तान नहर कार्य योजना पर क्यों है संघर्ष?
चोलिस्तान रेगिस्तान तक पानी पहुंचाने के लिए सिंधु नदी से छह जलमार्ग के निर्माण की स्कीम बनाई गई है। इस कार्य योजना की लागत लगभग 211.4 अरब पाकिस्तानी पैसे बताई गई है, जिससे तख़मीना 4 लाख एकड़ बंजर भूमि को कृषि योग्य बनाया जा सकता है।

हालांकि, सिंध में इस कार्य योजना का सर्वव्यापी दुश्मनी हो रहा है। राजनीतिक दलों, धार्मिक कंपनियों और नागरिक समाज ने इस परियोजना के विरुद्ध पूरे प्रांत में शानदार प्रदर्शन किए हैं। उनका आरोप है कि इससे सिंध प्रांत के हिस्से का पानी जबरन छीनने की प्रयास हो रही है।
न्यायालय का हस्तक्षेप और परियोजना पर रोक
पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ की प्रतिवेदन के मुताबिक, सिंध हाई कोर्ट में दायर याचिका पर समीक्षा के दौरान अतिरिक्त अटॉर्नी जनरल ने न्यायालय को खबर दी कि नहर परियोजना पर काम रोक दिया गया है। न्यायालय ने पहले ही गवर्नमेंट को हुक्म दिया था कि विवादित परियोजना पर तुरंत रोक लगाई जाए।

सिंधु नहर विवाद की चेतावनी आगे क्या होगा?
बिलावल भुट्टो का रुख साफ है कि अगर केंद्र गवर्नमेंट ने उनकी बात नहीं मानी तो PPP गठबंधन छोड़ने के लिए मुस्तैद है। इस संघर्ष ने पाकिस्तान की राजनीति में नई हंगामा मचा दी है और आने वाले समय में शहबाज शरीफ गवर्नमेंट के लिए कठिनाई बढ़ सकती हैं।