USA- होर्मुज संकट के बीच भारत को झटका, रूस से सस्ते तेल पर अमेरिका की सख्ती

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होर्मुज संकट
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वॉशिंगटन/नई दिल्ली। वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अमेरिका (America) ने साफ संकेत दे दिया है कि अब ईरान और रूस (Iran and Russia) के तेल पर दी जा रही छूट आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। इससे भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए सस्ते कच्चे तेल की उपलब्धता पर असर पड़ना तय माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बना हुआ है।

अमेरिका ने नहीं बढ़ाई छूट की अवधि

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बुधवार को पत्रकारों को बताया कि अमेरिका ईरानी और रूसी तेल पर छूट की अवधि नहीं बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि हम रूसी तेल के लिए सामान्य लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं करेंगे, न ही ईरानी तेल के लिए सामान्य लाइसेंस का विस्तार किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह छूट केवल उन खेपों के लिए थी जो 11 मार्च से पहले पानी में थीं और अब उनका पूरा उपयोग हो चुका है। इन कदमों से संकेत मिलता है कि ट्रंप प्रशासन अब प्रतिबंधों में ढील देकर तेल आपूर्ति बढ़ाने की नीति से पीछे हट रहा है।

भारत को मिला था बड़ा फायदा

इन प्रतिबंधों में मिली छूट का भारत को बड़ा फायदा हुआ था। इसकी बदौलत भारत होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) के आसपास पैदा हुई रुकावटों के बावजूद रूसी तेल की खरीद जारी रख सका। उस दौरान समुद्र में कई जहाज फंस गए थे, जिससे सप्लाई प्रभावित हुई थी। रूसी तेल की खरीद पर मिली छूट की वजह से भारत वैश्विक आपूर्ति में आई कमी के बीच अतिरिक्त तेल सुनिश्चित कर पाया। रिपोर्टों के मुताबिक, इस दौरान भारतीय रिफाइनरों ने करीब 30 मिलियन बैरल रूसी तेल के ऑर्डर दिए।

रिफाइनरों ने बदली रणनीति

रिलायंस समेत देश की प्रमुख रिफाइनिंग कंपनियों ने इस साल जनवरी में अमेरिकी दबाव के चलते रोसनेफ्ट और लुकोइल जैसी रूसी कंपनियों से खरीद कम कर दी थी। हालांकि, हालात बदलते ही उन्होंने अपनी रणनीति में बदलाव किया और रूसी कंपनियों से फिर अधिक मात्रा में तेल खरीदना शुरू कर दिया।

ईरानी तेल की भी हुई वापसी

छूट के दौरान ईरान का कच्चा तेल ले जाने वाले कम से कम दो सुपरटैंकर भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचे, जो करीब सात वर्षों में पहली बार हुआ। ऐतिहासिक रूप से भारत ईरान के कच्चे तेल का एक प्रमुख खरीदार रहा है।
रिफाइनरियों के लिए अनुकूलता और व्यापारिक शर्तों के कारण भारत, ईरान के हल्के और भारी दोनों ग्रेड के तेल का आयात करता रहा है।

अमेरिका ने जारी किया था अस्थायी लाइसेंस

मार्च में जब ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट के अहम ऊर्जा मार्ग पर नियंत्रण मजबूत किया, तब अमेरिका ने 30 दिनों का विशेष लाइसेंस जारी किया था। इसके तहत 12 मार्च से पहले लादे गए रूसी तेल की डिलीवरी और बिक्री की अनुमति दी गई थी, जो 11 अप्रैल को समाप्त हो गई। ईरानी तेल के लिए भी 20 मार्च को ट्रेजरी विभाग ने इसी तरह की छूट दी थी, जिससे करीब 140 मिलियन बैरल तेल वैश्विक बाजार में पहुंच सका और युद्ध के दौरान आपूर्ति पर पड़े दबाव को कम करने में मदद मिली। यह छूट 19 अप्रैल को खत्म होने वाली है।

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आगे क्या होगा? बढ़ सकती हैं कीमतें

अब छूट खत्म होने के बाद वैश्विक बाजार में तेल आपूर्ति पर दबाव बढ़ने की आशंका है। इसका सीधा असर भारत जैसे आयातक देशों पर पड़ सकता है, जहां ईंधन कीमतों और महंगाई पर असर देखने को मिल सकता है।

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Anuj Kumar

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