Chagos: चागोस द्वीप विवाद

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मुइज्जू का नया दांव और भारत पर इसके रणनीतिक प्रभाव

माले: मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने पूर्ववर्ती सरकार की नीतियों को पलटते हुए चागोस द्वीप समूह पर मॉरीशस की संप्रभुता को मान्यता देने से इनकार कर दिया है। मुइज्जू का दावा है कि विवादित समुद्री क्षेत्र मालदीव के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन (EEZ) का हिस्सा है। जानकारों का मानना है कि यह कदम आगामी स्थानीय काउंसिल चुनावों को देखते हुए उठाया गया है, जहाँ ‘राष्ट्रवाद’ के मुद्दे को भुनाकर जनसमर्थन जुटाने की कोशिश की जा रही है। इसके साथ ही, मुइज्जू अंतरराष्ट्रीय मंच पर मालदीव की स्थिति को एक आक्रामक खिलाड़ी के रूप में पेश करना चाहते हैं

ट्रंप कार्ड और वैश्विक कूटनीति में विफलता

मुइज्जू ने चागोस मुद्दे को हवा देकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लुभाने की कोशिश की, जिन्होंने पहले चागोस पर ब्रिटेन के नियंत्रण छोड़ने को ‘गलत’ बताया था। मुइज्जू की मंशा अमेरिका के साथ सीधे तौर पर रणनीतिक सौदेबाजी करने की थी, लेकिन उन्हें वाशिंगटन और लंदन दोनों से अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली। ब्रिटेन ने स्पष्ट कर दिया है कि वह मॉरीशस के साथ अपने समझौते पर कायम है। यह मुइज्जू के लिए एक बड़ा राजनयिक झटका है, क्योंकि वह अंतरराष्ट्रीय नियमों (ITLOS के फैसले) की अनदेखी कर डिएगो गार्सिया जैसे महत्वपूर्ण सैन्य अड्डे के इर्द-गिर्द अपनी पैठ बनाना चाहते थे।

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भारत की चिंताएं और क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर

भारत हमेशा से चागोस पर मॉरीशस की संप्रभुता का समर्थक रहा है और इस समझौते की प्रक्रिया में शामिल रहा है। मुइज्जू का यह नया दावा भारत के लिए दोहरी चुनौती पेश करता है। एक ओर, मुइज्जू ‘इंडिया आउट’ अभियान के जरिए भारतीय सैनिकों को बाहर निकाल चुके हैं, और दूसरी ओर, वे अब अमेरिकी सैन्य बेस (डिएगो गार्सिया) के पास अपनी दावेदारी जताकर क्षेत्र में अस्थिरता पैदा कर रहे हैं। यदि मालदीव इस क्षेत्र में विदेशी सैन्य उपस्थिति या नए दावों को आगे बढ़ाता है, तो इससे हिंद महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने की भारत की ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ वाली रणनीति और क्षेत्रीय संतुलन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

राष्ट्रपति मुइज्जू ने चागोस द्वीप पर मालदीव की पिछली नीति को क्यों बदला?

मुइज्जू ने दो मुख्य कारणों से यह बदलाव किया है: पहला, मालदीव में होने वाले स्थानीय चुनावों में राष्ट्रवादी भावनाओं का लाभ उठाना, और दूसरा, डोनाल्ड ट्रंप के पिछले बयानों का फायदा उठाकर अमेरिका के साथ एक नई रणनीतिक डील करना, ताकि मालदीव को हिंद महासागर की भू-राजनीति में एक शक्तिशाली केंद्र बनाया जा सके।

चागोस विवाद पर भारत का स्टैंड क्या है और मुइज्जू के कदम से भारत क्यों चिंतित है?

भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मॉरीशस की संप्रभुता का समर्थन करता रहा है। भारत की चिंता यह है कि मुइज्जू के इस कदम से हिंद महासागर में अनावश्यक विवाद पैदा होगा, जिससे समुद्री सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। साथ ही, मुइज्जू का दोहरा रवैया-जहाँ वे भारत की उपस्थिति का विरोध करते हैं लेकिन अमेरिका के साथ गुप्त कूटनीति की कोशिश करते हैं-क्षेत्र में भारत के रणनीतिक हितों को नुकसान पहुँचा सकता है।

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Dhanarekha

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