H1B Visa: अमेरिकी वीज़ा नियमों से भारतीयों पर असर

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नए नियम से फ्रेशर्स को बड़ा झटका

वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) प्रशासन ने एच-1बी वीज़ा(H1B Visa) के नियमों में बदलाव करते हुए लॉटरी सिस्टम की जगह वेतन-आधारित चयन प्रक्रिया लागू करने का निर्णय लिया है। इस बदलाव से सीधे तौर पर भारत (India) के युवा इंजीनियरों और आईटी प्रोफेशनल्स पर असर पड़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि जहां सीनियर और उच्च वेतन पाने वाले कर्मचारियों को लाभ मिलेगा, वहीं नए ग्रेजुएट्स का अमेरिका में नौकरी पाने का सपना अधूरा रह सकता है

वेतन आधारित चयन और भारत पर प्रभाव

नए नियम के अनुसार अब पहले उन आवेदकों को वीज़ा मिलेगा जिनकी सैलरी सबसे अधिक होगी। पहले जहां हर साल हजारों भारतीय इंजीनियर्स और सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल्स लॉटरी सिस्टम से वीज़ा पाते थे, अब कम वेतन वाले फ्रेशर्स को पीछे कर दिया जाएगा। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि इस नीति से पारदर्शिता आएगी और केवल सर्वश्रेष्ठ प्रोफेशनल्स ही प्रवेश पा सकेंगे।

अमेरिकी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2024 में भारतीयों को 2.07 लाख एच-1बी वीज़ा(H1B Visa) जारी किए गए थे। इनमें से अधिकांश आईटी और इंजीनियरिंग प्रोफेशनल्स रहे। लेकिन नए नियम के लागू होने के बाद शुरुआती स्तर की नौकरियों में गिरावट आ सकती है। इससे भारतीय कंपनियों को भी भर्ती और वेतन रणनीति पर पुनर्विचार करना होगा।

स्थानीय नागरिकों को प्राथमिकता और आलोचना

वाइट हाउस (White House) ने अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) के उस प्रस्ताव को मंजूरी दी है जिसमें लंबे समय से लागू लॉटरी सिस्टम हटाकर वेतन आधारित चयन प्रक्रिया लाने की बात कही गई थी। आलोचकों का आरोप है कि यह कदम स्थानीय लोगों को नौकरी देने और विदेशी प्रोफेशनल्स को सीमित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

ट्रंप प्रशासन के पहले कार्यकाल में भी भारतीयों के वीज़ा(H1B Visa) में कमी आई थी। अब स्थिति दोबारा वैसी ही होने की आशंका जताई जा रही है। दूसरी ओर, विशेषज्ञों का कहना है कि इस बदलाव से अमेरिका को उच्च स्तरीय विशेषज्ञ तो मिलेंगे, लेकिन एंट्री लेवल की नौकरियों पर सीधा असर पड़ेगा।

प्रोफेशनल्स की राय और भारतीय युवाओं की चुनौती

H1B Visa
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अमेरिका में भारतीय प्रोफेशनल्स को लेकर पहले से बहस जारी रही है। अब कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि रोजगार संकट का असली कारण भारतीय नहीं, बल्कि अमेरिकी कंपनियों की रणनीतियां हैं। इसके बावजूद नए नियम से भारतीय युवाओं का रास्ता कठिन हो जाएगा।

अभी तक बहुत से नए ग्रैजुएट्स 50,000 डॉलर से कम पैकेज पर भी एच-1बी वीज़ा पाकर अमेरिका चले जाते थे। लेकिन अब इस स्तर पर अवसर लगभग बंद हो जाएंगे। आईटी इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।

बी वीज़ा में नया बदलाव क्या है?

नया बदलाव यह है कि अब लॉटरी सिस्टम की जगह वेतन-आधारित चयन लागू होगा। इसमें पहले उन आवेदकों को मौका मिलेगा जिनकी तनख्वाह अधिक होगी, जिससे फ्रेशर्स के अवसर घट जाएंगे।

भारतीय प्रोफेशनल्स पर इसका क्या असर होगा?

सीनियर और ज्यादा वेतन पाने वाले भारतीय इंजीनियर्स को फायदा होगा, लेकिन नए इंजीनियरों और आईटी प्रोफेशनल्स के लिए वीज़ा पाना मुश्किल होगा। इससे भारत का युवा वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित होगा।

आईटी इंडस्ट्री की प्रतिक्रिया कैसी है?

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बदलाव भारतीय आईटी कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण होगा। उन्हें अब भर्ती और वेतन नीति पर नए सिरे से सोचना पड़ेगा, क्योंकि कम वेतन पर नियुक्तियां मुश्किल हो जाएंगी।

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Dhanarekha

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