IRAN- ईरान संघर्ष का असर, पश्चिम एशिया में भारतीय निर्यात में भारी गिरावट

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ईरान संघर्ष
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अमेरिका-इजराइल और ईरान (Israel and Iran) के बीच जारी युद्ध का असर अब भारत के व्यापार पर भी साफ नजर आने लगा है। पश्चिम एशिया (West Asia) को होने वाला भारतीय निर्यात घटकर लगभग आधा रह गया है। वाणिज्‍य सचिव राजेश अग्रवाल ने मार्च के व्यापार आंकड़े जारी करते हुए बताया कि इस क्षेत्र में भारत के निर्यात में 57.95 फीसदी और आयात में 51.64 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य बंद, व्यापार पर बड़ा असर

ईरान पर 28 फरवरी को हुए हमले के बाद प्रमुख समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य अस्थायी रूप से बंद हो गया था। करीब 33 किलोमीटर चौड़ा यह रास्ता भारत और पश्चिम एशिया के बीच व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है। इसके बंद होने से माल ढुलाई पर बड़ा असर पड़ा और व्यापार गतिविधियां प्रभावित हो गईं।

निर्यात में 3.5 अरब डॉलर की गिरावट

सामान्य परिस्थितियों में भारत हर महीने इस क्षेत्र को करीब 6 अरब डॉलर (लगभग 60 हजार करोड़ रुपए) का निर्यात करता है, लेकिन मार्च में यह आंकड़ा घटकर महज 2.5 अरब डॉलर (करीब 24 हजार करोड़ रुपए) रह गया। यानी एक ही महीने में करीब 3.5 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई।

इन सेक्टर्स पर पड़ी सबसे ज्यादा मार

वाणिज्य सचिव के मुताबिक, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, पेट्रोलियम और चावल जैसे प्रमुख क्षेत्रों के निर्यात में सबसे ज्यादा गिरावट आई है। अप्रैल महीने में भी हालात चुनौतीपूर्ण बने रहने की आशंका जताई गई है।

सप्लाई चेन में बदलाव, नए बाजारों की तलाश

अग्रवाल ने कहा कि इस तरह के संकट के दौरान वैश्विक आपूर्ति शृंखला में बदलाव देखने को मिलता है। भारतीय निर्यातक अब नए बाजारों की तलाश कर रहे हैं ताकि नुकसान की भरपाई की जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल भारत की नहीं, बल्कि वैश्विक लॉजिस्टिक्स से जुड़ी समस्या है।

कच्चे माल की कीमतों में उछाल

पश्चिम एशिया से तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण इस्पात, प्लास्टिक और रबर जैसे कच्चे माल की कीमतों में भी तेजी आई है। इससे उद्योगों पर लागत का दबाव बढ़ गया है।

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सरकार के प्रयास और आगे की चुनौती

सरकार ने खाड़ी क्षेत्र की स्थिति से निपटने के लिए निर्यातकों के समर्थन में कई कदम उठाए हैं। 2024-25 में इस क्षेत्र को भारत का निर्यात करीब 57 अरब डॉलर रहा था, जबकि कुल द्विपक्षीय व्यापार 178 अरब डॉलर तक पहुंचा था। हालांकि मौजूदा संकट को देखते हुए आने वाले समय में इस व्यापार में और गिरावट की आशंका जताई जा रही है।

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Anuj Kumar

लेखक परिचय

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