इस्लामाबाद । पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच (Pakistan Navy) ने (Strait of Hormuz) के पास फंसे अपने मालवाहक जहाजों को एस्कॉर्ट करने से फिलहाल पीछे हटने का फैसला किया है। पाकिस्तान ने स्वीकार किया है कि उसकी नौसेना न तो इस जलडमरूमध्य को पार करेगी और न ही Persian Gulf में कोई अभियान चलाएगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज फिलहाल अरब सागर के क्षेत्र में ही तैनात रहेंगे। माना जा रहा है कि Iran द्वारा समुद्र में बिछाई गई संभावित बारूदी सुरंगों के खतरे को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।
समुद्र में बारूदी सुरंगों का खतरा
अमेरिका ने दावा किया है कि Iran ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास समुद्री बारूदी सुरंगें बिछा दी हैं। इससे न केवल युद्धपोतों बल्कि व्यापारिक जहाजों के लिए भी बड़ा खतरा पैदा हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस क्षेत्र में बारूदी सुरंगें सक्रिय हो जाती हैं तो अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात और तेल आपूर्ति दोनों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
पाकिस्तानी नौसेना का सीमित अभियान
पाकिस्तानी मीडिया ने एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया कि (Pakistan Navy) फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश नहीं कर रही है। इसके बजाय वह अपने समुद्री मार्गों पर व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा दे रही है। एक सुरक्षा अधिकारी के अनुसार, यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।
‘ऑपरेशन मुहाफिज-उल-बहर’ की शुरुआत
पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग के अनुसार नौसेना ने ‘ऑपरेशन मुहाफिज-उल-बहर’ शुरू किया है। इस अभियान के तहत नौसेना के जहाज मर्चेंट शिप को एस्कॉर्ट कर रहे हैं ताकि देश की ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो और समुद्री संचार मार्ग सुरक्षित बने रहें। यह ऑपरेशन खास तौर पर Karachi को खाड़ी क्षेत्र और Red Sea से जोड़ने वाले समुद्री मार्गों पर केंद्रित है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इसे होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा मिशन के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
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क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। यह अरब की खाड़ी का संकरा प्रवेश द्वार है, जहां से दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। हाल के दिनों में Iran और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस मार्ग पर टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने यहां से गुजरने की कोशिश करने वाले जहाजों को चेतावनी भी दी है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
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