रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने एक बार फिर रूस-भारत-चीन (RIC) त्रिपक्षीय संबंधों को पुनर्जीवित करने की वकालत की है। उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को आसान करने पर आपसी सहमति बन गई है, और अब वक्त आ गया है कि RIC को एक बार फिर सक्रिय किया जाए।
यूरेशिया सम्मेलन में रखे विचार
लावरोव ने यूरेशिया में सुरक्षा और सहयोग पर आधारित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि मास्को को RIC प्रारूप के तहत सहयोग को फिर से आरंभ करने में वास्तविक रुचि है। यह फॉर्मेट रूस के पूर्व प्रधानमंत्री येवगेनी प्रिमाकोव की पहल पर आरंभ हुआ था।
“हम चाहते हैं कि भारत, चीन और रूस मिलकर क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एकजुट हों,” – सर्गेई लावरोव
उन्होंने कहा कि इस ढांचे में अब तक 20 से अधिक बार विदेश मंत्रियों और अन्य एजेंसियों की बैठकें हो चुकी हैं।

भारत-चीन के बीच बनी सहमति
लावरोव के अनुसार, भारत और चीन के बीच सीमा तनाव को सरल बनाने के तरीकों पर सहमति बन गई है। यह एक सकारात्मक संकेत है, विशेष रूप से जून 2020 में गलवान घाटी संघर्ष के बाद जब रिश्ते बेहद तनावपूर्ण हो गए थे।
2024 ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का प्रभाव
अक्टूबर 2024 में रूस के कज़ान में हुए ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात ने तनाव को कम करने की दिशा में पहला कदम साबित किया। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रिश्तों को सुधारने की ज़रूरत को स्वीकारा था।
नाटो पर रूस का बड़ा आरोप
रूसी विदेश मंत्री ने यह भी इलज़ाम लगाया कि NATO भारत को चीन विरोधी साजिशों में घसीटने की प्रयत्न कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत इस उकसावे को समझता है और उसमें भागीदार नहीं हो रहा।
“भारत NATO की मंशा को भलीभांति समझता है और संतुलित विदेश नीति अपना रहा है,” – लावरोव