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IRAN- ईरान पर ट्रंप का सख्त अल्टीमेटम, 10 दिन में समझौता नहीं तो बड़े कदम के संकेत

Author Icon By Anuj Kumar
Updated: February 20, 2026 • 12:56 PM
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वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति (Donald Trump) ने ईरान के साथ जारी तनाव के बीच कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि अगले 10 दिनों में कोई सार्थक समझौता नहीं हुआ तो हालात गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि डील न होने की स्थिति में “बुरी चीजें” हो सकती हैं और अमेरिका कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।

10 दिन की मोहलत, सख्त संदेश

राष्ट्रपति ट्रंप (President Trump) ने यह बयान वॉशिंगटन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया। उन्होंने कहा कि ईरानी प्रतिनिधियों के साथ बातचीत जारी है और अब तक की वार्ता “रचनात्मक” रही है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि इतिहास गवाह है—ईरान के साथ ठोस और प्रभावी समझौता करना आसान नहीं है। ट्रंप ने कहा, “शायद हम समझौता कर लें, शायद नहीं। अगले 10 दिनों में स्थिति साफ हो जाएगी।”

अमेरिकी वार्ताकारों की भूमिका

राष्ट्रपति ने अमेरिकी वार्ताकार स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों ईरान के साथ अप्रत्यक्ष वार्ता का नेतृत्व कर रहे हैं। उनके मुताबिक बैठकों का माहौल सकारात्मक है, लेकिन अंतिम सहमति तक पहुंचने में अभी समय लग सकता है। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि यदि बातचीत विफल रहती है तो अमेरिका के पास अन्य विकल्प भी मौजूद हैं।

बढ़ता तनाव और सैन्य गतिविधियां

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान (America and Iran) के बीच तनाव चरम पर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने मध्य-पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। विमानवाहक पोत, लड़ाकू जेट और अतिरिक्त रक्षा प्रणालियां तैनात की गई हैं। दूसरी ओर, सैटेलाइट तस्वीरों से संकेत मिले हैं कि ईरान अपने परमाणु और मिसाइल ठिकानों को मजबूत कर रहा है। हालांकि तेहरान लगातार इस बात से इनकार करता रहा है कि वह परमाणु हथियार विकसित कर रहा है।

2015 परमाणु समझौते की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में 2015 के ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका को बाहर कर लिया था। यह समझौता औपचारिक रूप से Joint Comprehensive Plan of Action (जेसीपीओए) के नाम से जाना जाता है। ट्रंप का कहना था कि यह समझौता कमजोर और अपर्याप्त है। बाद में पूर्व राष्ट्रपति Joe Biden के कार्यकाल में इसे पुनर्जीवित करने की कोशिश हुई, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया। हाल ही में जेनेवा में हुई वार्ता को दोनों पक्षों ने सकारात्मक बताया, हालांकि वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक कई बड़े मतभेद अब भी बरकरार हैं।

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अगले 10 दिन अहम

विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले 10 दिन अमेरिका-ईरान संबंधों की दिशा तय कर सकते हैं। यदि समझौता होता है तो क्षेत्र में स्थिरता की उम्मीद बढ़ेगी, लेकिन विफलता की स्थिति में तनाव और बढ़ सकता है। दुनिया की निगाहें अब इस संभावित डील पर टिकी हैं।

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