‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति से समझौते का दबाव
वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प(Trump) ने ईरान के खिलाफ अपनी आक्रामक रणनीति को और तेज कर दिया है। ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका का एक और नौसैनिक बेड़ा ईरान की ओर बढ़ रहा है, जबकि परमाणु शक्ति से लैस युद्धपोत ‘USS अब्राहम लिंकन’ पहले से ही मिडिल ईस्ट में तैनात है। मिडिल ईस्ट के अलग-अलग हिस्सों में फिलहाल 30,000 से 40,000 अमेरिकी सैनिक और कई मिसाइल डिस्ट्रॉयर मौजूद हैं। इस सैन्य मौजूदगी का मुख्य उद्देश्य ईरान पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना और उसे अमेरिका की शर्तों पर नए समझौते के लिए मजबूर करना है।
अमेरिका की 4 सख्त शर्तें और परमाणु विवाद
ट्रम्प प्रशासन ने ईरान के साथ किसी भी नई डील के लिए चार प्रमुख शर्तें रखी हैं: यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) पर पूर्ण प्रतिबंध, संवर्धित यूरेनियम के स्टॉक को हटाना, लंबी दूरी की मिसाइलों पर लगाम और क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों को फंडिंग बंद करना। ट्रम्प(Trump) ने 2015 के ओबामा काल के परमाणु समझौते (JCPOA) को ‘दुनिया का सबसे खराब समझौता’ बताकर उससे हाथ खींच लिए थे। उनका मानना है कि पिछला समझौता ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने में नाकाम था, इसलिए अब ‘मैक्सिमम प्रेशर’ की नीति अपनाई जा रही है।
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तनाव और भविष्य की रणनीति
ईरान में जारी आंतरिक विरोध प्रदर्शनों के बीच ट्रम्प ने संकेत दिया है कि ईरान अब बातचीत के लिए उत्सुक हो सकता है। हालांकि, ट्रम्प(Trump) ने जून में ईरान के फोर्डो, नतांज और इस्फहान जैसे परमाणु ठिकानों पर हुए हमलों का जिक्र कर अपनी ताकत का अहसास भी कराया है। अमेरिका का स्पष्ट संदेश है कि यदि ईरान शर्तों को नहीं मानता या प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा करता है, तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें मिडिल ईस्ट की इस ‘शक्ति प्रदर्शन’ की जंग पर टिकी हैं।
‘USS अब्राहम लिंकन’ की तैनाती ईरान के लिए चिंता का विषय क्यों है?
‘USS अब्राहम लिंकन’ अमेरिकी नौसेना का एक विशाल न्यूक्लियर-पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर है। यह दर्जनों लड़ाकू विमानों, मिसाइलों और आधुनिक राडार सिस्टम से लैस है। इसकी उपस्थिति का मतलब है कि अमेरिका बेहद कम समय में ईरान के किसी भी हिस्से पर बड़ा हवाई हमला करने में सक्षम है, जो इसे दुनिया के सबसे घातक युद्धपोतों में से एक बनाता है।
ट्रम्प की ‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति क्या है?
इस नीति का उद्देश्य आर्थिक और सैन्य दबाव के जरिए ईरान को पूरी तरह अलग-थलग करना है। इसके तहत अमेरिका ने ईरान(Trump) के तेल निर्यात को शून्य करने की कोशिश की, उसके बैंकिंग सेक्टर पर 1500 से ज्यादा कड़े प्रतिबंध लगाए और विदेशी कंपनियों को ईरान के साथ व्यापार न करने की चेतावनी दी। ट्रम्प का मानना है कि इससे ईरान की आर्थिक कमर टूटेगी और वह उनकी शर्तों पर झुकने को मजबूर होगा।
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