Geneva । मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में (United Nations Security Council) (यूएनएससी) ने खाड़ी क्षेत्र में हाल में हुए मिसाइल और ड्रोन हमलों को लेकर एक अहम प्रस्ताव पारित किया है। इस प्रस्ताव में Iran द्वारा खाड़ी देशों और वहां स्थित सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की गई है और क्षेत्र में शांति बनाए रखने की अपील की गई है।
बहुमत से पारित हुआ निंदा प्रस्ताव
रिपोर्ट के अनुसार, बहरीन की पहल पर लाए गए इस प्रस्ताव को सुरक्षा परिषद में व्यापक समर्थन मिला। प्रस्ताव के पक्ष में कुल 13 सदस्य देशों ने मतदान किया, जबकि दो सदस्य मतदान प्रक्रिया से अनुपस्थित रहे। खास बात यह रही कि किसी भी देश ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट नहीं दिया।
पाकिस्तान ने भी किया प्रस्ताव का समर्थन
Pakistan ने भी प्रस्ताव के समर्थन में मतदान करते हुए कहा कि क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता का असर पूरे इलाके पर पड़ सकता है। हालांकि (Russia) और (China) मतदान के दौरान मौजूद नहीं रहे।
खाड़ी देशों पर हमलों को बताया अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन
पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि ईरान द्वारा Bahrain, Kuwait, Oman, Qatar, Saudi Arabia, United Arab Emirates और Jordan के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाइयां अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन हैं। परिषद ने कहा कि इस तरह के हमले वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं।
हमलों को तुरंत रोकने की मांग
सुरक्षा परिषद ने ईरान से मांग की है कि वह खाड़ी देशों के खिलाफ अपनी सभी शत्रुतापूर्ण गतिविधियों को तुरंत बंद करे। साथ ही संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद-51 के तहत देशों को सामूहिक आत्मरक्षा के अधिकार की भी पुष्टि की गई है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में हमलों पर चिंता
परिषद ने Strait of Hormuz और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में नागरिक बुनियादी ढांचे, वाणिज्यिक जहाजों और आम नागरिकों को निशाना बनाने की घटनाओं की भी तीखी आलोचना की। प्रस्ताव में चेतावनी दी गई है कि ऐसे हमलों से वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर असर पड़ सकता है।
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क्षेत्रीय शांति प्रयासों की सराहना
यूएनएससी ने खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) देशों और अन्य क्षेत्रीय मध्यस्थों के उन प्रयासों की भी सराहना की, जिनका उद्देश्य बातचीत के माध्यम से विवादों का शांतिपूर्ण समाधान निकालना है। 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद, जिसमें United States, रूस, चीन, France और United Kingdom जैसे स्थायी सदस्य शामिल हैं, ने इस प्रस्ताव के जरिए मिडिल ईस्ट में स्थिरता बनाए रखने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रस्ताव ईरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम साबित हो सकता है।
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