Russia-तेल कीमतों में उछाल से रूस की किस्मत चमकी, पुतिन का युद्ध फंड मजबूत

Read Time:  1 min
पुतिन
पुतिन
FONT SIZE
GET APP

Moscow । पश्चिम एशिया में Iran, Israel और (United States) के बीच जारी भीषण संघर्ष का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। इस तनाव ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार को झकझोर दिया है और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। इसका सबसे बड़ा फायदा Russia को मिल रहा है, जहां बढ़ती तेल कीमतों ने राष्ट्रपति (Vladimir Putin) के युद्ध फंड को नई मजबूती दे दी है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य बना वैश्विक ऊर्जा संकट का केंद्र

इस पूरे घटनाक्रम में (Strait of Hormuz) की भूमिका सबसे अहम बनकर उभरी है। यह जलमार्ग दुनिया का प्रमुख ऊर्जा चोकपॉइंट माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। ईरान से जुड़े तनाव के कारण इस मार्ग पर अनिश्चितता बढ़ गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल आपूर्ति को लेकर चिंता गहरा गई है।

रूस की ऊर्जा मांग में अचानक उछाल

ईरान संकट के चलते कई देशों ने ऊर्जा आपूर्ति के लिए फिर से रूस की ओर रुख करना शुरू कर दिया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता Dmitry Peskov ने भी स्वीकार किया है कि रूसी ऊर्जा की मांग में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है और बाजार अब रूस को एक भरोसेमंद सप्लायर के रूप में देख रहे हैं।

रूसी तेल की कीमतों में तेज उछाल

Ukraine पर हमले के बाद रूस का यूराल्स क्रूड अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी सस्ता बिक रहा था, लेकिन ईरान संकट ने हालात बदल दिए हैं। अब रूसी तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और कई जगह यह Brent crude के मुकाबले प्रीमियम दरों पर बिक रहा है। भारत जैसे बड़े तेल खरीदारों के लिए रूस फिर से प्रमुख विकल्प बन गया है।

तेल से बढ़ा रूस का युद्ध कोष

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान संकट से पहले रूस अपनी सैन्य अर्थव्यवस्था को लेकर दबाव में था। लेकिन तेल की कीमतों में पिछले एक सप्ताह में 25 से 50 प्रतिशत तक की वृद्धि ने उसे नई आर्थिक ताकत दे दी है। यूराल्स क्रूड की कीमत लगभग 45 डॉलर से बढ़कर करीब 68 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। यह अतिरिक्त आय सीधे रूस के युद्ध कोष में जा रही है, जिससे यूक्रेन की उन कोशिशों को झटका लग सकता है जिनका उद्देश्य रूस की आर्थिक ताकत को कमजोर करना था।

अन्य पढ़े: लैपटॉप-डेस्कटॉप होंगे 35% तक महंगे

लंबा चला संकट तो रूस होगा और मजबूत

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि फारस की खाड़ी का यह संकट लंबे समय तक जारी रहता है, तो रूस आर्थिक रूप से और अधिक मजबूत हो सकता है। ऐसी स्थिति में मॉस्को यूक्रेन के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई को लंबे समय तक जारी रखने की स्थिति में आ सकता है।

Read More :

Anuj Kumar

लेखक परिचय

Anuj Kumar

सूचना : इस वेबसाइट पर प्रकाशित खबरें केवल पाठकों की जानकारी के उद्देश्य से दी जाती हैं। हम अपनी ओर से यथासंभव सही और सटीक जानकारी प्रदान करने का प्रयास करते हैं।