नई दिल्ली। अमेरिका में बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं और मोटापे के मामलों को देखते हुए सरकार ने अपनी डाइट गाइडलाइंस में बड़े बदलाव किए हैं। नई गाइडलाइंस (New Guideline) के अनुसार लोगों को प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाकर ताजा और असली भोजन अपनाने की सलाह दी गई है।
अमेरिका में स्वास्थ्य खर्च का 90% हिस्सा क्रॉनिक बीमारियों पर
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका में हेल्थकेयर (Healthcare) खर्च का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा क्रॉनिक बीमारियों पर खर्च हो रहा है, जिनमें मोटापा, डायबिटीज और हृदय रोग प्रमुख हैं। स्वास्थ्य एजेंसियों के अनुसार, इन बीमारियों की मुख्य वजह अत्याधिक प्रोसेस्ड फूड का सेवन है।
अमेरिका में 75% लोग ओवरवेट या मोटापे का शिकार
आंकड़ों की बात करें तो अमेरिका में करीब 75 प्रतिशत लोग ओवरवेट या मोटापे का शिकार हैं। लगभग 50 प्रतिशत आबादी डायबिटीज या प्रीडायबिटीज (Prediabeties) से प्रभावित है। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे घर का बना ताजा खाना, फल, सब्जियां, प्रोटीन युक्त आहार और कम शक्कर-नमक वाला भोजन अपनाएं।
शहरीकरण के साथ बढ़ रहा प्रोसेस्ड फूड का चलन
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में तेजी से बढ़ता शहरीकरण और बदलती जीवनशैली प्रोसेस्ड और जंक फूड की खपत बढ़ा रही है। देश में लगभग 29 प्रतिशत लोग ओवरवेट या मोटापे से ग्रस्त हैं, जबकि डायबिटीज के मामलों में हर साल औसतन 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो रही है।
बच्चों में मोटापा: चिंताजनक स्थिति
बच्चों में मोटापे के मामले भी चिंताजनक स्तर तक पहुँच गए हैं।
पैकेट पर चेतावनी और पोषण जानकारी जरूरी
भारतीय विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि प्रोसेस्ड फूड की स्पष्ट परिभाषा और पैकेट पर चेतावनी जरूरी है। पोषण संबंधी जानकारी जनता तक पहुंचानी चाहिए। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के प्रति जागरूकता बढ़ानी होगी।
अगर समय पर कदम नहीं उठाए गए तो स्वास्थ्य संकट बढ़ सकता है
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत ने समय रहते कदम नहीं उठाए, तो आने वाले वर्षों में देश में ज्यादा लोगों को गंभीर स्वास्थ्य संकट का सामना करना पड़ सकता है।
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