Uttar Pradesh : स्कूल परिसर में महिला टीचर ने की आत्महत्या

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उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के एक स्कूल से हैरान करने वाली घटना सामने आई है, जहां मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर एक महिला टीचर ने स्कूल परिसर में ही फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. घटना के बाद स्कूल में हड़कंप मच गया।

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले (Uttar Pradesh) के हरख विकासखंड स्थित कंपोजिट स्कूल उदवापुर में शनिवार को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब स्कूल परिसर के अंदर ही एक महिला टीचर ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. मृतका की पहचान उमा वर्मा (40) के रूप में हुई है, जो इसी स्कूल में असिस्टेंट टीचर के पद पर कार्यरत थीं. घटना की जानकारी मिलते ही स्कूल स्टाफ, गांव वालों और शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्कूल (School) में ही टीचर उमा का शव फंदे से लटका मिला. इसकी सूचना मिलते ही आसपास के गांवों से लोग मौके पर पहुंच गए और बड़ी संख्या में भीड़ जुट गई. स्कूल प्रशासन ने तत्काल घटना की जानकारी पुलिस और शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को दी. सूचना पर सतरिख थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. पुलिस पूरे मामले की जांच पड़ताल कर रही है।

दो बच्चों की मां थी मृतका

बताया गया है कि टीचर उमा वर्मा दो बच्चों की मां थीं और अपने परिवार के साथ जिले के जलालपुर गांव में रहती थीं. उनके पति ऋषि वर्मा भी शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं और सिद्धौर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय टेण्ड़वां गांव में असिस्टेंट टीचर के पद पर तैनात हैं. घटना के बाद इलाके में शोक और स्तब्धता का माहौल है. साथ काम करने वाली टीचर और स्थानीय लोग इस बात को लेकर काफी हैरान हैं कि आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थिति रही होगी, जिसने एक शिक्षिका को इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।

‘ढाई साल से किया जा रहा था प्रताड़ित’

मृतका के पति ऋषि वर्मा ने आरोप लगाया कि स्कूल का स्टाफ पिछले ढाई साल से लगातार उनकी पत्नी को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था. जब वह मन लगाकर बच्चों को पढ़ाती थीं तो स्टाफ के लोग टीका-टिप्पणी करते थे. कई बार पूरे स्टाफ ने मिलकर उनके खिलाफ शिकायतें कीं. हम ट्रांसफर के लिए प्रयास कर रहे थे, लेकिन ट्रांसफर नहीं हो पाया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सभी शिक्षकों ने उन्हें फंदे पर लटका देखा, लेकिन कोई भी उन्हें उतारकर समय पर इलाज के लिए नहीं ले गया।

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स्कूल स्टाफ करता था परेशान

समय पर इलाज मिलने से शायद जान बच जाती. सुबह 10:30 बजे मुझसे बात हुई थी, लेकिन न परेशान दिख रही थीं और न ही मुझे कोई बात महसूस हुई. मृतका के भाई शिवाकांत वर्मा ने बताया कि मेरी बहन मन लगाकर बच्चों को पढ़ाती थीं. इस बात को लेकर पूरा स्टाफ टीका-टिप्पणी करता था कि ‘बड़ी पढ़ाने वाली है, इनको अवार्ड चाहिए. एक-दो बार हमने उन्हें परेशान देखा तो पूछा लेकिन वह टाल देती थीं।

उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य रूप से सहायक अध्यापक सुशील वर्मा और इंचार्ज सीतावती, जया और अर्चना ने उन्हें परेशान किया. इनका बच्चों से पढ़ाने का कोई मतलब नहीं था, जबकि मेरी बहन लगातार मन से पढ़ाती थीं और बच्चों का चयन भी हो रहा था. शिवाकांत ने घटना को संदिग्ध बताते हुए कहा कि जिस प्रधानाध्यापक के कमरे में फांसी लगाई उसका दरवाजा अंदर से लॉक नहीं था खुला था।

पहले स्टाफ ने वहां की सभी चीजों को ठीक कियाय. उसके बाद पुलिस को बुलाया गया. जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी नवीन कुमार पाठक ने बताया कि घटना अत्यंत दुखद है. इस पूरे मामले में पुलिस जांच कर रही है. यदि कोई दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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Surekha Bhosle

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Surekha Bhosle

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