आर्थिक संकट और ईंधन की मार
वाशिंगटन: स्पिरिट(Spirit) एयरलाइंस ने 2 मई 2026 को अपने सभी ऑपरेशंस स्थायी रूप से बंद करने का ऐलान कर दिया है। CEO डेव डेविस के मुताबिक, कंपनी के पास अब बिजनेस चलाने के लिए नकदी (Cash) खत्म हो चुकी थी। इस पतन की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में आया उछाल रहा। अमेरिका-ईरान तनाव और हॉर्मुज स्ट्रेट बंद होने के कारण ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया। बजट एयरलाइन होने के नाते स्पिरिट के पास टिकट की कीमतें बढ़ाने की सीमित गुंजाइश थी, जिससे वह महंगे फ्यूल का खर्च नहीं उठा सकी।
फेल हुई सरकारी डील और भारी कर्ज
कंपनी को बचाने के लिए ट्रम्प प्रशासन के साथ 500 मिलियन डॉलर (₹4,700 करोड़) का बेलआउट पैकेज लगभग तय था, लेकिन बॉन्डहोल्डर्स के साथ सहमति न बन पाने के कारण शनिवार सुबह यह डील फेल हो गई। गौरतलब है कि 2020 से अब तक कंपनी को करीब 24 हजार करोड़ रुपए का घाटा हो चुका था। जेटब्लू और फ्रंटियर एयरलाइंस के साथ मर्जर की कोशिशें भी कानूनी और वित्तीय अड़चनों के कारण सफल नहीं हो पाईं, जिससे एयरलाइन के पास दिवालिया होने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा।
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यात्रियों और भविष्य के हवाई सफर पर असर
एयरलाइन के बंद होने से हजारों यात्री अधर में लटक गए हैं। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि जिन यात्रियों ने क्रेडिट कार्ड से भुगतान किया है, वे रिफंड ले सकते हैं, लेकिन ‘फ्री स्पिरिट पॉइंट्स’ और वाउचर की वैल्यू अब शून्य हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्पिरिट के जाने से ‘स्पिरिट इफेक्ट’ (सस्ती होड़) खत्म हो जाएगा, जिससे अमेरिका में हवाई सफर काफी महंगा हो सकता है।
स्पिरिट एयरलाइंस के बंद होने के तीन मुख्य कारण क्या रहे?
मुख्य कारण ईंधन की बढ़ती कीमतें (120 डॉलर प्रति बैरल), ट्रम्प प्रशासन के साथ ₹4,700 करोड़ की डील का फेल होना और 2020 से अब तक हुआ ₹24,000 करोड़ का भारी घाटा है।
यदि किसी यात्री ने पॉइंट्स या वाउचर से टिकट बुक की थी, तो क्या उन्हें रिफंड मिलेगा?
नहीं, कंपनी ने साफ किया है कि वाउचर और एयरलाइन पॉइंट्स अब मान्य नहीं हैं। ऐसे यात्रियों को अब रिफंड के लिए दिवालियापन अदालत (Bankruptcy Court) की कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बनना होगा।
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